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विज्ञान

धरती को एस्टेरॉयड हमलों से बचाने की मुहिम

पिछले 13 साल में धरती से 26 ऐसे क्षुद्रग्रह टकराए जिनमें से कुछ की क्षमता दूसरे विश्व युद्ध में हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 40 गुना ज्यादा थी. एक अमेरिकी फाउंडेशन धरती को इन टक्करों के प्रभाव से बचाने में लगा है.

हमारे ग्रह धरती से टकराने वाले ये एस्टेरॉयड या क्षुद्रगह बहुत ताकत के साथ धरती से टकराते हैं. इसकी ताकत कितनी हो सकती है इसका अंदाज ऐसे लग सकता है, 1945 में जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की शक्ति करीब 15 किलोटन थी. उस बम हमले का असर पूरी तरह आज भी नहीं गया है. वहां पैदा होने वाले कई बच्चे आज भी किसी तरह की अपंगता के शिकार होते हैं.

और 2000 से 2013 के बीच जो 26 क्षुद्रग्रह धरती से टकराए उनकी विस्फोटन क्षमता 1 से 600 किलोटन टीएनटी के बीच समझी जा सकती है. अमेरिका का एक प्राइवेट फाउंडेशन अब अंतरिक्ष में एक ऐसा मिशन भेजना चाहता है जो इनकी धरती पर टक्कर होने से रोक सके. किसी भी अंतरिक्ष मिशन की तरह ही यह भी खासा मंहगा होगा और इसीलिए फाउंडेशन चंदा इकट्ठा कर रही है. कैलिफोर्निया की स्पेसफ्लाइट कंपनी 'स्पेस-एक्स' इस टेलिस्कोप को 2018 में भेजने वाली है. प्राइवेट फंड से भेजा जाने वाला ये दुनिया का पहला अंतरिक्ष मिशन होगा.

ग्रहिकाओं की टक्कर के असर को नापने के लिए सेंसरों के एक बड़े नेटवर्क की मदद ली गई. 'न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी' नामका एक अंतरराष्ट्रीय संगठन, जो न्यूक्लियर विस्फोटों का पता लगाने के लिए इस नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, उसी से ये आंकड़े मिले. सच तो ये है कि हर समय अनगिनत ग्रहिकाएं या उनके टुकड़े धरती से टकराते रहते हैं. कैलिफोर्निया में स्थित बी-612 फाउंडेशन इसके साथ ये भी बताता है कि इनमें से ज्यादातर हमारी धरती के वातावरण में आने से पहले ही फूट जाते हैं और इसीलिए धरती पर उनका ज्यादा असर नहीं होता.

पिछले ही साल रूस के चेल्याबिंस्क इलाके में 600 किलोटन की विस्फोटन क्षमता वाले क्षुद्रग्रह के टुकड़े गिरे थे. उसके अलावा बीते सालों में इंडोनेशिया, दक्षिणी महासागर और भूमध्यसागर में भी 20 किलोटन से ज्यादा शक्ति वाली कई ग्रहिकाएं गिरीं. पूर्व अन्तरिक्ष यात्री और इस फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ एड लू बताते हैं, "ऐसे ज्यादातर बड़े एस्टेरॉयड्स का समय रहते पता लग गया था जो पूरे देश या महाद्वीप को तबाह कर सकते थे. लेकिन हम नहीं जानते कि अगली टक्कर कहां और कब हो सकती है इसलिए अगर हम अब तक शहरों को तबाह करने वाले प्रलयंकारी क्षुद्रग्रहों की टक्कर से बचे हुए हैं तो यह सिर्फ संयोग की बात है."

इसी स्थिति को बदलने के लिए फाउंडेशन की योजना है कि आसमान में एक ऐसा टेलिस्कोप भेजा जाए जो धरती की तरफ बढ़ने वाले किसी एस्टेरॉयड के बारे में पहले ही चेतावनी दे सके. इस इन्फ्रारेड तकनीक वाले दूरदर्शी को 'सेंटिनल स्पेस टेलिस्कोप मिशन' का नाम दिया गया है. उम्मीद है कि यह टेलिस्कोप धरती के पास मौजूद पांच लाख के करीब क्षुद्रग्रहों पर नजर रखेगा. फाउंडेशन का मानना है कि अगर पहले से पता लग जाए तो धरती पर पहुंचने के दशकों पहले ही तकनीक के इस्तेमाल से उन ग्रहिकाओं के रास्ते को बदला जा सकेगा.

आरआर/एएम (डीपीए)

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