धमकियों के बीच मतदान की दहलीज पर अफगानिस्तान | दुनिया | DW | 03.04.2014
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दुनिया

धमकियों के बीच मतदान की दहलीज पर अफगानिस्तान

तालिबान की तमाम धमकियों और चुनाव प्रचार के दौरान हमलों के बावजूद अफगानिस्तान इस शनिवार राष्ट्रपति चुनाव के लिए तैयार है. प्रचार के आखरी दिन काबुल में गृहमंत्रालय के सामने एक आत्मघाती हमले में छह पुलिसकर्मी मारे गए.

मतदान से 48 घंटे पहले कल देर रात तमाम चुनावी प्रचार रोक दिए गए. चुनाव अधिकारी नूर मुहम्मद नूर के मुताबिक चुनावी प्रचार की अवधि बुधवार मध्यरात्रि तक ही थी. नूर ने बताया, "अगले 48 घंटों में किसी भी प्रत्याशी को रैलियों में हिस्सा लेने, भीड़ जमा करने, भाषण देने या मीडिया को इंटरव्यू देने का अधिकार नहीं है."

नाजुक हालात

चुनाव प्रचार के आखरी दिन बुधवार को ही काबुल में गृह मंत्रालय के सामने एक आत्मघाती हमले में छह पुलिसकर्मी मारे गए. हमले की जिम्मेदारी तालिबान ने ली. मतदान से तीन दिन पहले ही राजधानी के बीचों बीच ऐसा हमला देश में चुनाव के समय सुरक्षा को लेकर कठिन स्थिति की तरफ संकेत करता है.

हालांकि किसी बड़ी चुनावी रैली पर हमला नहीं हुआ, लेकिन प्रचार का दौर हिंसात्मक रहा. दो बार चुनाव कार्यालयों पर भी हमले हुए. इन हमलों में कई चुनावी अधिकारियों और प्रत्याशियों के समर्थकों को भी निशाना बनाया गया और कई लोग मारे गए.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का अफगानिस्तान में प्रतिनिधित्व कर रहे अधिकारी यान कूबिस ने भी लोगों से मतदान में हिस्सा लेने को कहा है. उन्होंने कहा, "यह मौका आपका है, यह आपका अधिकार है. आपको किसी को इस बात की इजाजत नहीं देनी चाहिए कि वह आपको आपके मतदान के अधिकार से वंचित रख सके. शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से ही देश का भविष्य सुनिश्चित हो सकता है."

हौसले पस्त नहीं

अफगानिस्तान से स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (आईईसी) के प्रमुख यूसुफ नूरिस्तानी कहते हैं, "अफगानिस्तान के नए नेता के चुनाव में तालिबान की धमकी से लोगों के हौसले पस्त नहीं होने वाले." उन्होंने सभी अफगान नागरिकों से अपील की है कि वे इन खतरों से डरे बगैर मतदान में हिस्सा लें और अपने पसंदीदा सदस्य को वोट दें.

नाटो प्रमुख ने भी अफगान नागरिकों की हौसला अफजाई की और उन्हें वोट डालने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने विश्वसनीय, सामूहिक और पारदर्शी चुनाव को अहम बताया.

नूरिस्तानी ने बताया कि अफगानिस्तान में जून में शुरू हुई मुहिम के तहत करीब 38 लाख नए मतदाताओं का पंजीकरण हुआ है. चुनाव आयोग के अनुसार करीब 1.2 करोड़ मतदाता चुनाव में हिस्सा लेने योग्य हैं. शनिवार को होने वाले मतदान के लिए देश भर में 6,423 मतदान केंद्र तैयार किए गए हैं, इनमें से कुछ बेहद असुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में भी हैं.

हमलों से डर नहीं

राष्ट्रपति पद के प्रमुख उम्मीदवार अशरफ गनी के सहायक हमीदुल्लाह फारूकी ने बताया कि विश्व बैंक के पूर्व इंजीनियरों ने उनके साथ कई प्रांतों में 10 से ज्यादा रैलियों में हिस्सा लिया. उन्होंने हजारों लोगों को इन रौलियों में संबोधित भी किया. फारूकी के अनुसार, "पिछले दो महीनों में हमने देश भर में बड़े स्तर पर चुनावी प्रचार किया. हमें एहसास हुआ कि लोकतंत्र में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. उन्हें देख कर लग रहा था कि वे अब खामोश बैठने के लिए तैयार नहीं." हालांकि उन्होंने माना कि चुनावी रैलियों के दौरान उन्हें सुरक्षा संबंधी बड़ी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा. "हमारा एक प्रचारक साथी हेरात में मारा गया, इसके अलावा जलालाबाद से काबुल और फरयाब से बाल्ख के हाईवे पर हमें धमकियां मिलीं."

अन्य प्रमुख प्रत्याशी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने पिछले दो महीनों में करीब 15 रैलियों को संबोधित किया. वह कहते हैं, "मेरे ख्याल में यह अब तक का सबसे शानदार चुनावी प्रचार था. लोगों ने खुद आगे बढ़कर पूरे जोश के साथ प्रचार कार्यक्रमों में हिस्सा लिया." अब्दुल्लाह के प्रवक्ता ने बताया कि उनके चुनावी प्रचार में शामिल करीब दस सदस्य मारे गए और कई घायल हो गए.

तालिबान इस हफ्ते हो रहे चुनाव को एक नकली चुनावी प्रक्रिया बता रहा है और इसे भंग करने की धमकी देता आया है. बुधवार को उसने मतताओं को चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा न लेने की फिर से धमकी दी. तालिबान ने कहा, "हर अधिकारी और मतदान केंद्र खतरे में है." धमकी में देश भर में हमलों की बात कही गई है.

एसएफ/एएम (डीपीए)

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