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ताना बाना

दो साल के लिए भारत से ब्रिटेन जाएंगे 51 डॉक्टर

मरीजों की बढ़ती और डॉक्टरों की घटती संख्या से जूझ रहा ब्रिटेन अब भारत में डॉक्टरों की भर्ती के अभियान में जुटा है. वेल्स के विभिन्न अस्पतालों में काम के लिए भारत से करीब 51 डॉक्टरों को बुलाए जाने की तैयारी हो रही है.

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जिन चिकित्सकों को भारत से ब्रिटेन लाया जा रहा है वे ब्रिटेन में मिडिल ग्रेड पर काम करेंगे. सिर्फ वेल्स में ही लगभग 400 डॉक्टरों की कमी है. आशंका जताई जा रही है कि अगर खाली पदों पर योग्य डॉक्टरों की भर्ती नहीं हुई तो मेडिकल सुविधाओं के स्तर में गिरावट आ सकती है. हालांकि जिन 51 चिकित्सकों को अब वेल्स लाया जा रहा है उन्हें भी सिर्फ दो साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है और उनका वहां बसना संभव नहीं होगा.

भारत में डॉक्टरों का चयन करने वाली लियोना वाल्श का कहना है कि इंटरव्यू देने वाले हर डॉक्टर का कहना था कि ब्रिटेन में नौकरी इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि विदेश में रहने का अनुभव लेने की उनकी इच्छा है.

वाल्श के मुताबिक वेल्स के अस्पतालों में काम कर रहे 40 फीसदी डॉक्टर बाहर से हैं जो एक बड़ी संख्या है. वेल्स में मरीज विदेशी डॉक्टरों और अन्य पृष्ठभूमियों से आए लोगों को डॉक्टर के रूप में देखने के आदी हो चुके हैं. नए डॉक्टरों का पहला समूह अगस्त में वेल्स पहुंचने की उम्मीद है.

जिन 51 डॉक्टरों को चुना गया है उनमें से अधिकतर को भारत में काम करने का दो साल का अनुभव है. वैसे अभी उन्हें एक परीक्षा से गुजरना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें वेल्स में डॉक्टर के रूप में काम करने की अनुमति है.

ब्रिटेन में कई दशकों से भारतीय डॉक्टर आते रहे हैं लेकिन 2006 में कड़े नियमों के बाद उनका आना कम हो गया था. उन नियमों में यूरोपीय देशों के डॉक्टरों को प्राथमिकता देने की बात कही गई. लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते कई अस्पतालों को आपातकालीन विभाग और अन्य विभागों को बंद करना पड़ा है. ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा एनएचएस में काम करने वाले एक भारतीय डॉक्टर के मुताबिक इमिग्रेशन नियमों के कड़े होने के चलते कई भारतीय डॉक्टर वापस लौट गए.

उनका कहना है कि भले ही ब्रिटेन भारतीय डॉक्टरों को बुलाने का इच्छुक हो लेकिन कम ही लोग वहां जाना चाहेंगे क्योंकि उन्हें ब्रिटेन में दो साल से ज्यादा रुकने की अनुमति नहीं होगी. ब्रिटेन का स्वास्थ्य विभाग वीजा नियमों में छूट की वकालत करने के पक्ष में खड़ा नजर आता है लेकिन इमिग्रेशन पॉलिसी ब्रिटेन का गृह मंत्रालय तय करता है और वहां से छूट मिलने की संभावना फिलहाल कम है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: एन रंजन