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दुनिया

दो तिहाई देश 2015 के शिक्षा लक्ष्य से चूके

यूनेस्को ने 15 साल पहले 164 देशों के साथ मिलकर सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया था, जिसमें ज्यादातर देश असफल साबित हुए हैं. अगले महीने इंचियॉन में फिर तय होने हैं 2030 के लिए नए लक्ष्य.

साल 2000 में यूनेस्को के बैनर तले आयोजित विश्व शिक्षा फोरम में दुनिया के 164 देशों ने आपसी सहमति से 2015 तक सर्वशिक्षा का लक्ष्य तय किया था. लेकिन यूएन की 2015 की वार्षिक रिपोर्ट दिखाती है कि इनमें से बहुत कम देशों ने ही यह लक्ष्य हासिल किया. इस मकसद को सफलतापूर्वक पूरा करने वालों में कई यूरोपीय देशों समेत क्यूबा, किर्गिस्तान और मंगोलिया शामिल हैं.

वहीं पाकिस्तान, यमन और उप-सहारा अफ्रीका के कई देश लक्ष्य से बहुत दूर रह गए. यूएन रिपोर्ट दिखाती है कि कुल 164 देशों में से करीब आधे ही वैश्विक प्राइमरी शिक्षा का लक्ष्य पूरा कर पाए हैं. यूनेस्को की महानिदेशक आइरीना बोकोवा का मानना है कि इस 15 सालों में, "पूरी दुनिया में महत्वपूर्ण विकास हुए हैं." बोकोवा बताती हैं, "अगर 1990 के दशक जैसे ट्रेंड बरकरार रहते तो उसके मुकाबले कई लाख ज्यादा बच्चे आज स्कूलों में हैं." उनका मानना है कि सरकारों को "सबसे गरीब वर्ग - खासकर लड़कियों को - को वरीयता देने" की जरूरत है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमीरों के मुकाबले दुनिया के सबसे गरीब बच्चों के स्कूल जाने की संभावना करीब चार गुना कम होती है. दुनिया भर में इस समय करीब 5.8 करोड़ बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, इसके अलावा करीब 10 करोड़ ऐसे हैं जो प्राइमरी तक की शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाते. प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर की कक्षाओं में लिंगानुपात पहले से बेहतर हुआ है. रिपोर्ट इस पर रोशनी डालती है कि लड़कियों की पढ़ाई में अब भी सबसे बड़ी बाधा "कम उम्र में उनकी शादी कर देने और गर्भवती होने के कारण" आ रही है.

2000 में हुए दकार शिक्षा सम्मेलन में यह भी उम्मीद जताई गई थी कि इस साल तक दुनिया भर के अनपढ़ वयस्कों की संख्या को आधा किया जा सकेगा. मगर सच्चाई यह है कि वैश्विक साक्षरता दर में बहुत कम अंतर आया. यह साल 2000 में 18 फीसदी थी जो 2015 में करीब 14 प्रतिशत दर्ज हुई है. यूनेस्को ने बताया कि दुनिया के कुल निरक्षर वयस्कों में से करीब दो तिहाई महिलाएं हैं.

एक महीने में ही यूनेस्को दक्षिण कोरिया के इंचियॉन में फिर से विश्व शिक्षा फोरम का आयोजन करने वाला है, जिसमें 2030 के लिए नए शिक्षा लक्ष्य तय किए जाएंगे. रिपोर्ट में सरकारों को सलाह दी गई है कि वे अपने राष्ट्रीय बजट का 15 से 20 फीसदी शिक्षा में लगाएं.

आरआर/एमजे (एएफपी)

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