दो ज्वालामुखी अब विश्व धरोहर | मनोरंजन | DW | 22.06.2013
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

दो ज्वालामुखी अब विश्व धरोहर

यूरोप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी पूर्वी सिसली के माउंट एटना और जापान के माउंट फुजी को यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया है. कंबोडिया में एक बैठक के दौरान यह घोषणा की गई.

विश्व धरोहर कमेटी ने इटली के माउंट एटना को यह पदवी 2,700 साल से सक्रिय होने और इसके वैज्ञानिक महत्व के मद्देनजर दी है और कहा कि इसका शैक्षणिक और सांस्कृतिक महत्व वैश्विक है.

वहीं जापान के माउंट फुजी को विश्व धरोहर घोषित करते हुए कमेटी ने कहा, इसके बर्फ से ढंके हुए शिखर ने "कई कलाकारों और कवियों को प्रेरित किया है. और कई सदियों से यह पर्यटन स्थल रहा है.

संयुक्त राष्ट्र की शैक्षणिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक संगठन समिति की 37वीं बैठक कंबोडिया के फनोम पेन्ह में चल रही है.

अनगिनत डेटा

यूनेस्को के लिए इटली के राजदूत मॉरिजिनो एनरिको लुइगी सेरा ने कहा कि एटना "भूगर्भीय आंकड़ों का कभी न खत्म होना वाला स्रोत है."

एटना 3,300 मीटर ऊंचा है और यह सिसली के कैटेनिया सिटी के नजदीक है. सिसली की पुराने समुद्र तटरेखा पर करीब पांच लाख साल पहले यह ज्वालामुखी बना था.

इसके मुख्य क्रेटर से कई बार लावा फूटता है. कई बार आस पास के गांव भी इसके कारण संकट में पड़ जाते हैं. कैटेनिया 1969 में ज्वालामुखी फटने से प्रभावित हुआ था. इसके बाद शहर को फिर से बारोक स्टाइल में बनाया गया. 2013 के अप्रैल में भी यह एक बार सक्रिय हुआ था.

Mount Fuji

फुजीसान

जापान का माउंट फूजी

फुजी को विश्व धरोहर घोषित करते हुए कमेटी ने कहा, "फुजीसान का शानदार फॉर्म और कभी कभी इसकी सक्रियता से मिली प्रेरणा यहां के धार्मिक क्रियाकलापों में शामिल हुई है. जो शिंतो और बौद्ध धर्म, लोगों और प्रकृति को आपस में जो़ड़ती है. माउंट फूजी ने 19वीं सदी की शुरुआत में कई कलाकारों को प्रभावित किया और उससे ऐसे चित्र बने जो संस्कृति की सीमाओं से परे थे. उनके कारण ये ज्वालामुखी पर्वत दुनिया भर में मशहूर हुआ. और इसका पश्चिमी कला के विकास में काफी असर रहा."

फुजीसान टोक्यो से 100 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में स्थित है. यह आखिरी बार 300 साल पहले फूटा था. इसके शिखर की तस्वीरें दुनिया भर में पर्यटन साहित्य का हिस्सा हैं.

यूनेस्को ने पर्वत के शिखर और इसके ढलान पर बने मंदिर, लॉजिंग हाउस सहित झरने, कुंड और लावा ट्री मोल्ड भी धरोहर में शामिल हुए हैं. कमेटी के मुताबिक ये सब मिल कर फुजीसान की धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक हैं.

माउंट फुजी जापान का 17वां स्थान है जो विश्व धरोहर में शामिल किया गया है.

एएम/आईबी (एफपी, डीपीए)

DW.COM

संबंधित सामग्री