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दुनिया

दोषियों के लिए मौत की सजा मांगेगी पुलिस

दिल्ली पुलिस ने सामूहिक बलात्कार कांड में एक हजार पन्नों का आरोप पत्र तैयार किया है. यह गुरुवार को कोर्ट में पेश होगा. सख्त कानून की मांग पर सरकार ने कहा संसद के सत्र पर फैसला वर्मा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद होगा .

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोप पत्र पर कानूनी जानकारों की राय ली जा रही है. 16 दिसंबर की घटना की चार्जशीट में 30 गवाहों का जिक्र है. जांच अधिकारियों ने कहा है कि वे दोषियों के लिए मौत की सजा मांगेंगे. आरोप पत्र दक्षिण दिल्ली की साकेत जिला अदालत में पेश किया जाएगा. चार्जशीट में पांच लोगों का जिक्र है, इसके साथ ही एक अलग रिपोर्ट जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को भेजी गई है. बर्बर बलात्कार और हत्याकांड मामले में पुलिस ने जिन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनमें 17 साल का एक लड़का भी है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बलात्कार, हत्या और दूसरी कई धाराएं लगाई हैं.

इस बीच विपक्षी पार्टियां महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सख्त कानून बनाने के लिए संसद के विशेष सत्र की मांग कर रही हैं. सरकार की तरफ से वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस बारे में कहा है, "हमने जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन किया है जो सरकार को यह सलाह देगी कि कानून में क्या बदलाव होना चाहिए. ऐसे में जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती संसद के सत्र का कोई मतलब नहीं है." कमेटी का गठन इसी महीने की 23 तारीख को किया गया.

वर्मा कमेटी को मौजूदा कानूनों की समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है जिससे कि न्याय की प्रक्रिया को तेज और यौन हमलों के गंभीर मामलों में ज्यादा कड़ी सजा का उपाय किया जा सके. कमेटी को 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है. इस बीच गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की ओर से सभी राजनीतिक दलों को पत्र भेज कर महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त कानून पर अपने विचार और सलाह वर्मा कमेटी को देने का अनुरोध किया जा रहा है.

बलात्कार जैसी घटना के दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए आम लोगों की तरफ से भारी दबाव है और हर रोज राजपथ से लेकर इंडिया गेट और देश के अलग अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. देश की सत्ताधारी गठबंधन की मुख्य कांग्रेस पार्टी ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसमें बलात्कार के दोषी को 30 साल तक की सजा दी जाएगी. पार्टी सूत्रों के हवाले से एक भारतीय अखबार ने यह खबर दी है. इसके साथ ही प्रस्ताव में दोषियों की नसबंदी कराने की भी बात है.

बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने कानून में सुधार की भी मांग की है. बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने कहा है, "फास्ट ट्रैक अदालतों को शुरू किया जाना चाहिए जो हर रोज सुनवाई करें और 30 दिन में फैसला दे दिया जाए. इसके साथ ही अपील की प्रक्रिया भी तीन से छह महीने के भीतर पूरी कर ली जाए और कहीं कोई दया याचिका पर विचार न हो." दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड में एक किशोर की भूमिका को देखते हुए ऐसी भी मांग उठ रही है कि किशोरों को सजा देने के लिए उनके खिलाफ कानून को और सख्त बनाया जाए.

इसी बीच दिल्ली सरकार ने पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया है. इस बीच पीड़ित परिवार ने कहा है कि जब तक दोषियों को फांसी की सजा नहीं मिल जाती वो चैन से नहीं बैठेंगे.

एनआर/ओएसजे (पीटीआई, डीपीए)

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