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दुनिया

देह व्यापार को कानूनी दर्जा मिले: एमनेस्टी

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मांग की है कि सरकारें देह व्यापार को कानूनी दर्जा दें और सेक्स वर्करों को अपराध के दायरे से बाहर निकाले. इस मांग के कारण संगठन विवादों में घिर गया है.

एमनेस्टी का कहना है कि यौनकर्मियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए जरूरी है कि देह व्यापार को अपराध का नाम ना दिया जाए. दो साल तक संयुक्त राष्ट्र, कई गैर सरकारी संगठनों और मानवाधिकार विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श करने के बाद एमनेस्टी ने मंगलवार को इस मुद्दे पर वोट डाले. डब्लिन में हुई एमनेस्टी की इंटरनेशनल काउंसिल की बैठक में 70 देशों के 400 प्रतिनिधि मौजूद थे. बहुमत वोट देह व्यापार को कानूनी दर्जा दिए जाने के पक्ष में डले लेकिन एमनेस्टी ने वोटों की सही संख्या पर जानकारी देने से इंकार कर दिया. एमनेस्टी इंटरनेशल के महासचिव सलिल शेट्टी ने इसे एक "ऐतिहासिक दिन" बताते हुए कहा, "यौनकर्मी दुनिया के सबसे अधिकारहीन लोगों में से हैं. उन्हें हमेशा पक्षपात, हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है." शेट्टी ने कहा कि इस निर्णय तक पहुंचने में काफी दिक्कतें भी हुईं, "यह फैसला न तो जल्दबाजी में लिया गया है और ना ही इसे लेना आसान था. हम दुनिया भर के अपने सदस्यों और जिन संगठनों ने हमारा साथ दिया, उनका आभार व्यक्त करना चाहते हैं."

एमनेस्टी की छवि पर सवाल

1961 में लंदन में स्थापित हुआ एमनेस्टी पिछले पांच दशकों से मानवाधिकारों के लिए काम करता आया है और उसकी सराहना भी हुई है. लेकिन यौनकर्मियों के अधिकारों की बात पर एमनेस्टी विवादों में घिर गया है. महिलाओं की तस्करी के खिलाफ काम करने वाले अमेरिका स्थित संगठन सीएटीडब्यलू ने एमनेस्टी के नाम एक खुला पत्र लिखा है, जिसपर अब तक 8,500 से अधिक लोग ऑनलाइन हस्ताक्षर कर चुके हैं. एमनेस्टी के फैसले के खिलाफ खड़े होने वालों में मेरिल स्ट्रीप, केट विंसलेट और एमा थॉम्पसन जैसे हॉलीवुड के बड़े नाम भी शामिल हैं.

संगठन की कार्यकारी निदेशक टाइना बीन का कहना है कि इससे एमनेस्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंचेगा. समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "इस दलील के पीछे कोई तर्क नहीं है कि शोषित को बचाने के लिए आप शोषक को अपराधी की श्रेणी से बाहर निकाल देंगे. इसका कोई मतलब ही नहीं है." उन्होंने कहा कि एमनेस्टी को समझना होगा कि पूरी दुनिया उन्हें देख रही है और इस तरह से वह अपनी विश्वसनीयता खो देगा, "एमनेस्टी ने अपनी आत्मा खो दी है और खुद को मानवाधिकार संगठन कहने का औचित्य भी."

आलोचनाओं के घेरे में

एमनेस्टी चाहता है कि सिर्फ यौनकर्मी ही नहीं, बल्कि इस व्यापार से जुड़े अन्य पक्ष जैसे दलाल और चकला चलाने वालों को भी अपराधी ना माना जाए. दुनिया के कई देशों में वैश्यावृति को कानूनी दर्जा है. लेकिन ऐसी अधिकतर जगहों पर तीसरे पक्षों को नियंत्रित करने के कानून हैं ताकि यौनकर्मियों का शोषण ना हो सके. आलोचकों का मानना है कि एमनेस्टी जो मांग कर रहा है, उससे शोषण को बढ़ावा मिलेगा.

इसके अलावा इस बात पर भी बहस चल रही है कि एमनेस्टी गरीबी, हिंसा और उत्पीड़न जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज कर रहा है, जिन कारणों से महिलाएं देह व्यापार में जाने पर मजबूर होती हैं. इसके विपरीत एमनेस्टी का दावा है कि यौनकर्मियों और एचआईवी एड्स से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ लंबी बातचीत के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि देहव्यापार का गैरअपराधीकरण करने से ही यौनकर्मियों के साथ होनेवाली हिंसा को रोका जा सकता है.

आईबी/एमजे (डीपीए, एएफपी, रॉयटर्स)

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