1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

देश को महंगा पड़ा गुर्जर आंदोलन

राजस्थान में गुर्जर आंदोलन के कारण केवल रेल विभाग को ही 100 करोड़ रूपयों से ज्यादा का नुकसान हुआ. गुर्जरों को नौकरी में 5 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक लाने के सरकार के आश्वासन के बाद 8 दिनों तक चला आंदोलन समाप्त हुआ.

आरक्षण की मांग को लेकर राजस्थान में आंदोलन कर रहे गुर्जर समुदाय के लोगों ने जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर दिल्ली-मुंबई स्टेट हाईवे को भी ब्लॉक कर रखा था. आठ दिनों के बाद जाकर इन मार्गों को खोला जा सका. इसके अलावा रेलवे ट्रैकों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकर्ताओं के हटने के बाद रेल लाइनों में हुई टूट फूट की भी जांच की जा रही है. गुर्जर समुदाय ने अपने नेता किरोरी सिंह बैंसला के आह्वान पर 28 मई की रात अपना आंदोलन वापस लिया. बैंसला ने सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण का बिल संसद में पेश किए जाने का भरोसा दिलाए जाने के बाद ही अपने समर्थकों से बड़ताल खत्म करने को कहा.

इन 8 दिनों में देश की अर्थव्यवस्था खूब प्रभावित हुई. खास तौर पर देश की जीवनरेखा कही जाने वाली रेलवे को भारी नुकसान हुआ. ट्रेनों के रद्द होने या मार्ग बदले जाने से सैकड़ों मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से यात्रा करने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. 21 तारीख से केवल रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, आईआरसीटीसी पर ही लाखों की संख्या में यात्रियों के टिकट रद्द हुए. एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने कहा, "यात्री सेवाओं के अलावा, आंदोलन ने मालवाहक ट्रेनों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया." एक अनुमान के अनुसार रेलवे को हर दिन 35 करोड़ तक का नुकसान हुआ जबकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आंदोलन के कारण पहले 6-7 दिनों में ही 100 करोड़ रूपए तक का नुकसान हो चुका था.

सरकार के साथ बातचीत में गुर्जर समुदाय का नेतृत्व किरोरी सिंह बैंसला ने किया जबकि सरकार की ओर से राजस्थान के तीन मंत्रियों की एक समिति का गठन किया गया था. इसके पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि राज्य सरकार जल्दी से जल्दी आंदोलनकारियों से रेलवे ट्रैक और हाइवे से हटवाए. इससे पहले केन्द्र सरकार ने राजस्थान की राज्य सरकार को स्थिति पर काबू पाने में मदद के लिए 4,500 पैरामिलिट्री कर्मियों को भेजा था. गुर्जर समुदाय जिन मार्गों पर धरना दे रहा था वे थे - भरतपुर में पिलुकापुरा रेल मार्ग, दौसा के सिकंदरा में एनएच-11 और सवाईमाधोपुर में स्टेट हाईवे.

पहले राजस्थान सरकार ने गुर्जर समुदाय की 5 प्रतिशत आरक्षण वाली मांग को यह कह कर ठुकरा दिया था कि आरक्षण देने की 50 फीसदी की कानूनी सीमा के भीतर 5 फसदी का प्रावधान बनाने से सामाजिक सौहार्द्र पर बुरा असर पड़ सकता है. सरकारी कमेटी के साथ आगे की बातचीत में गुर्जरों की मांग मानने के लिए एक नए फॉर्मूले पर चर्चा हुई, जिसमें 5 फीसदी आरक्षण को 50 फीसदी की कुल सीमा के अतिरिक्त रखने का प्रस्ताव होगा.

आरआर/एमजे (पीटीआई)

DW.COM

संबंधित सामग्री