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दुनिया

दूसरे चरण में भी जर्मन राष्ट्रपति चुनाव पर फ़ैसला नहीं

जर्मन राष्ट्रपति चुनाव में सीडीयू-सीएसयू और एफ़डीपी के सत्तारूढ़ मोर्चे को करारा धक्का लगा है. चुनाव के दूसरे दौर में भी उसके उम्मीदवार को जीत नहीं मिली. अब चुनाव का तीसरा चरण हो रहा है.

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सत्तारूढ़ खेमे में मायूसी

राष्ट्रपति चुनाव के लिए विशेष रूप से गठित संघीय सभा उनका चुनाव कर रही है. इसमें 1244 सदस्य हैं - राष्ट्रीय संसद बुंडेसटाग के 622 सदस्य, तथा आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व के आधार पर प्रादेशिक विधायिकाओं द्वारा चुने गए बाक़ी 622 सदस्य. पहले या दूसरे दौर में जीत के लिए 623 सदस्यों का समर्थन ज़रूरी है, जबकि तीसरे दौर में सबसे अधिक मत पाने वाले को चुन लिया जाएगा.

दूसरे चरण में सत्तारूढ़ मोर्चे के उम्मीदवार क्रिस्टियान वुल्फ़ को 615 मत मिले, जो पहले चरण में मिले 600 मतों से अधिक हैं, लेकिन आवश्यक बहुमत से कम. संघीय सभा में सत्तारूढ़ मोर्चे के 644 मत हैं, और सभी सदस्य मतदान में उपस्थित हैं. एसपीडी और ग्रीन दल द्वारा समर्थित उम्मीदवार योआखिम गाउक को दूसरे चरण में 490 मत मिले. पहले चरण में उन्हें 499 मत मिले थे. एसपीडी और ग्रीन के 460 प्रतिनिधि मतदान में भाग ले रहे हैं. वामपंथी उम्मीदवार लुख योखिमसेन को पहले चरण में अपने प्रतिनिधियों से दो अधिक, यानी 126 मत मिले थे. दूसरे चरण में उन्हें 123 ही मत मिले.

अब तीसरे चरण का मतदान होने वाला है. वामपंथी पार्टी की ओर से कहा गया है कि योआखिम गाउक भी उनके लिए उतने ही अस्वीकार्य हैं, जितने कि सत्तारूढ़ मोर्चे के क्रिस्टियान वुल्फ़. ऐसी हालत में इसकी संभावना कम ही है कि मतों के गणित में गाउक क्रिस्टियान वुल्फ़ से आगे बढ़ पाएंगे. लेकिन चुने जाने के बावजूद सत्तारूढ़ मोर्चे, व ख़ासकर चांसलर अंगेला मैर्केल के लिए यह परिणाम एक करारा धक्का है, जिससे उनकी राजनीतिक हैसियत को एक ज़बरदस्त चुनौती मिली है.

रिपोर्ट: उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादन: महेश झा

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