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दुनिया

दूर है आर्थिक एकीकरण का लक्ष्य

जर्मनी दीवार गिरने की 25वीं सालगिरह मना रहा है. खस्ताहाल पूर्वी जर्मनी का पुनर्निर्माण करीब करीब पूरा हो चुका है. पिछड़ापन काफी हद तक खत्म हो गया है अब सिर्फ उत्पादकता एकदम कम है. जल्द ही यह कमी भी पूरी हो जाएगी.

इसकी कल्पना कीजिए: 4,00,000 लोग जर्मनी के पूर्वी हिस्से से पश्चिम चले गए. वह भी सिर्फ एक साल में. यह साल था बर्लिन दीवार के गिरने का साल, 1989. एक साल बाद और 4,00,000. साम्यवादी पूर्वी जर्मनी से लोग लगातार भाग रहे थे. पश्चिमी जर्मनी के चांसलर हेल्मुट कोल पर भारी दबाव था. दीवार गिरने के करीब तीन महीने बाद उन्होंने पहली जुलाई से पूर्वी जर्मनी में पश्चिमी मुद्रा लागू करने की घोषणा की. इसका मकसद लोगों को अपने यहां रहने के लिए प्रेरित करना था. इस तोहफे की अभी भी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.

आर्थिक विकास पर नजर रखनेवाले विशेषज्ञों की समिति ने 9 फरवरी 1990 को चांसलर को एक पत्र लिखा था. उसमें उन्होंने चांसलर कोल से मुद्रा संघ से पहले आर्थिक सुधार की पेशकश करने की अपील की थी. देश के चार प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने कोल को लिखा, "हम मुद्रा संघ पर फौरन अमल को लोगों के पलायन को रोकने का गलत साधन मानते हैं."

प्रतिस्पर्धा का अंत

लेकिन हेल्मुट कोल ने अर्थशास्त्रियों की शंका को नजरअंदाज कर दिया. पहली जुलाई 1990 से तत्कालीन जीडीआर के लोगों को एक से एक की दर पर मजदूरी, तनख्वाह और पेंशन डी-मार्क में मिलने लगी. जमा पूंजी को 2 जीडीआर मार्क के लिए एक डी-मार्क से बदला गया. मुद्रा की यह दर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था की उत्पादकता के अनुपात में नहीं थी. एसईडी तानाशाही के अंत में जीडीआर की उत्पादकता पश्चिम जर्मनी के मुकाबले एक तिहाई थी. विनिमय दर का नतीजा यह हुआ कि पूर्वी मालों की कीमत कई गुणा बढ़ गई.

और जब 1991 के शुरू में पश्चिम के उद्योगपतियों और ट्रेड यूनियनों ने पूरब के कामगारों का वेतन तय किया, जो पहले से काफी ज्यादा था. तो इसकी वजह से पूर्वी जर्मनी के उद्यमों की प्रतिस्पर्धी क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई. पूर्वी जर्मनी के हाले शहर में स्थित आर्थिक शोध संस्थान के गेरहार्ड हाइमपोल्ड कहते हैं, "वे कुछ हद तक उत्पादकता की रफ्तार से तेज थे, जिसका मतलब था कि उद्यम नया वेतन सहने की हालत में नहीं थे." उद्यम दिवालिया होने लगे. 2005 तक उद्योगों के बंद होने से 10 लाख नौकरियां खत्म हो गईं. बेरोजगारी बढ़कर 18.8 फीसदी हो गई. प्रशिक्षित युवा लोग पश्चिम की ओर पलायन करने लगे.

लहलहाती वादियां

फिर 2006 में मोड़ आया. बेरोजगारी कम होने लगी. 2013 तक बेरोजगारी दर गिरकर 10.3 प्रतिशत हो गई, 1991 के बाद से सबसे कम. इन आंकड़ों के ठीक से देखने पर पता चलता है कि जर्मनी के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में सीधा सादा अंतर करना काफी नहीं. पूर्वी प्रदेश थुरिंजिया की हालत पश्चिम के नॉर्थराइन वेस्टफेलिया या ब्रेमेन से बेहतर है. इसके अलावा पूरब के कुछ शहर और जिले चार और छह फीसदी बेरोजगारी के साथ बवेरिया या बाडेन वुर्टेमबर्ग जैसे पश्चिमी प्रांतों के साथ मेल खाते हैं.

सबसे प्रभावी आर्थिक विकास दीवार गिरने के बाद के पहले पांच सालों का है. जीडीआर का सरकारी खजाना खाली था, जिसकी वजह से मकानों, संरचना और उद्यमों में निवेश की भारी जरूरत थी. 1990 के दशक के मध्य तक सकल घरेलू उत्पादन इतनी तेजी से बढ़ा जितना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पश्चिम जर्मनी में आर्थिक चमत्कार के दिनों में बढ़ा था. ड्रेसडेन के इफो इंस्टीट्यूट के अनुसार 1991 से 2013 के बीच आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के कदमों पर पूर्वी जर्मनी को 560 अरब यूरो दिया गया. इस समय पूर्वी जर्मनी के उद्यमों में पूंजी की स्थिति पश्चिमी जर्मनी से बेहतर है, संरचना आधुनिक है और यूनिवर्सिटी बेहतर हालत में हैं.

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