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विज्ञान

दूध के चक्कर में गायों की आफत

दुनिया भर के कई देशों में डेयरी उद्योग ने गायों की हालत खस्ता कर दी है. जर्मनी, अमेरिका और भारत के ही कई डेयरी फॉर्मों में गायें पांच साल के भीतर दम तोड़ देती हैं. जर्मनी की तीन युवा रिसर्चर इसे रोकना चाहती हैं.

भारत में औसतन एक गाय साल भर में करीब एक हजार लीटर दूध देती है. वहीं जर्मनी और अमेरिका में दस हजार लीटर. कम वक्त में जितना ज्यादा दूध, मुनाफा भी उतना ही ज्यादा. हरियाणा के कई फार्मों में विदेशी ब्रीड की गायों की डिमांड बढ़ गयी है. कहा जाता है कि ये ज्यादा खाती हैं. पर सच्चाई यह है कि इन्हें ज्यादा खिलाया जाता है और महज पांच साल की उम्र तक इनकी जान चली जाती है.

जर्मन शहर श्लेसविग होलस्टाइन के फॉर्म में गायें, पौष्टिक कहा जाने वाला चारा, परफॉर्मानेट खा रही है. इससे गायें स्वस्थ भी रहेगी और ज्यादा दूध भी देगी. परफॉर्मानेट युवा रिसर्चरों की कंपनी ने तैयार किया है. श्लेसविग होलस्टाइन में नए चारे का परीक्षण हो रहा है. गायों के खून व मूत्र की जांच की जाएगी.

रिसर्चरों में से एक हाना-सोफी ब्राउन पेशे से पशु चिकित्सक हैं. वो अपनी साथी रिसर्चर के साथ आए दिन फॉर्म में आती हैं, "जिनका टेस्ट नहीं हुआ है उन्हें हमने मार्क किया है. उन पर इस तरह का गुलाबी निशान है. जिन पर हरा निशान है उनके मूत्र का परीक्षण हो चुका है."

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कड़ी प्रतिस्पर्धा में डेयरी उद्योग

वेटनरी डॉक्टरों को जांच के लिए गोशाला में जाना ही पड़ता है. यहां सब कुछ बहुत आसान नहीं होता. ब्राउन के मुताबिक, "कई बार गाय और ब्लड टेस्ट नहीं चाहती, तब हम रुक जाते हैं, वरना वो बाड़े में कूदने फांदने लगेगी और दूसरी गायों को भी हैरान करेगी. इसीलिए हमने उसे एक अलग थलग बाड़े में रखा है."

दूध के लिए चारा

शुरुआती लैब टेस्ट में पता चला है कि इनके बनाये चारे से गायों की सेहत बेहतर हो सकती है. कंपनी की संस्थापकों को लगता है कि ब्लड और यूरीन टेस्ट भी इस बात की गवाही देंगे. परफॉर्मानेट कंपनी की संस्थापकों में से एक यूलिया रोजेनडाल आम डेयरी फॉर्मों के बारे में अच्छी राय नहीं रखतीं, "वहां गायों को बहुत ज्यादा चारा दिया जाता है ताकि वो ज्यादा से ज्यादा दूध दे सकें. हमारा फूड सप्लीमेंट चारे के बेहतर इस्तेमाल में गायों की मदद करेगा."

जर्मनी में करीब हर दूसरी गाय अत्यधिक चारे की वजह से बीमार हो जाती है. 10 से 15 की उम्र के बावजूद गायें, पांच साल से ज्यादा नहीं जी पातीं. ब्राउन कहती हैं, "बड़े फार्म में हर दिन उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है. वो हर दिन चालीस की बजाए पचास लीटर दूध की मांग करते हैं. हम ऐसा बिल्कुल नहीं कर रहे हैं."

ये कंपनी की लैब है. बायोलॉजिस्ट काथेरीना हिले भी परफॉर्मानेट की तीन संस्थापकों में हैं. वो सप्लीमेंट फूड का फायदा साबित करना चाहती हैं, "हमारा फूड सप्लीमेंट मूत्र में अमोनिया की मात्रा भी कम करता है. हम टेस्ट से ये साबित भी कर सकते हैं. इसका फायदा सिर्फ गाय को ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी होता है. मूत्र के साथ निकलने वाला अमोनिया भाप बनकर पर्यावरण में घुल जाता है, ये पर्यावरण के लिए खराब है."

परफॉर्मानेट सप्लीमेंट को बाजार में उतारने के लिए तीनों रिसर्चरों ने अपनी कंपनी बनाई. उन्हें 4,40,000 यूरो की मदद मिली. जर्मनी के वित्त मंत्रालय ने भी मदद की.

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पारंपरिक तरीके से दुग्ध उत्पादन

कैसा हो डेयरी उद्योग

यूलिया रोजेनडाल को लगता है कि दुग्ध उद्योग में नए और पारंपरिक तरीके समानानंतर ढंग से चलते रहेंगे, "मुझे नहीं लगता कि मौजूदा आर्गेनिक दूध उत्पादक पुराना रास्ता छोड़ देंगे. बाजार में ऑर्गेनिक चीजों की मांग बहुत ज्यादा है. मुझे तो ऐसा ही लगता है. हम उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन के साथ पशुओं की बढ़िया सेहत भी चाहते हैं."

हाई परफॉर्मेंस डेयरी में साल भर में एक गाय 10 हजार लीटर दूध देती है. एक सदी पहले की तुलना में यह चार गुना ज्यादा है. परफॉर्मानेट गाय को सेहतमंद रखने के साथ किसानों की मुश्किल भी कम करेगा.

रिपोर्ट: डानिएल विसेविच/ओएसजे

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