1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

दूध कंपनियों पर जुर्माना

चीन ने बच्चों के लिए दूध बनाने वाली छह कंपनियों पर 11 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है. इन पर कीमतें तय करने और आपसी मुकाबले को मुश्किल बनाने वाली हरकतों में शामिल होने के आरोप में जांच के बाद जुर्माना लगा है.

मीड जॉन्सन न्यूट्रीशन कंपनी, डैनोन, फोन्टेरा, एबॉट लैब्रोरेट्रीज, फ्रीसलैंड कैम्पिना और बायोस्टाइम इंटरनेशनल पर यह जुर्माना लगाया गया है. यह सभी विदेशी कंपनियां हैं. चीन के राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग, एनडीआरसी ने एक महीने पहले कहा था कि वह इस मामले में जांच शुरू कर रहा है. उस वक्त विदेशी और घरेलू दवा कंपनियों के साथ ही सोने का कारोबार करने वाली कंपनियों पर भी कीमतों के मामले में एक अलग जांच शुरू हुई थी. वो जांच अभी चल रही है. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा है कि यह चीन के लिए यह जुर्माना एक रिकॉर्ड है.

शिशुओं के लिए विदेशी दूध की चीन में बड़ी मांग है. 2008 में लोगों का भरोसा हिल गया था, जब जहरीले मेलामाइन के अंश बच्चों के दूध में मिले थे और इसके कारण छह बच्चों की जान चली गई जबकि हजारों बीमार हो गए. चीन में बच्चों के दूध के बाजार में आधे हिस्से पर विदेशी कंपनियों का हिस्सा है और इनकी कीमत स्थानीय कंपनियों के मुकाबले करीब दुगुनी है. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बच्चों के दूध का बाजार 2017 तक बढ़ कर 25 अरब डॉलर का होने का अनुमान है.

एनडीआरसी ने एक बयान जारी कर कहा कि जुर्माना मुकाबला रोकने, प्राइस फिक्सिंग करने और बाजार की व्यवस्था को अलग अलग तरीकों से नुकसान पहुंचाने के लिए लगाया गया है. स्विस कंपनी नेस्ले, जापान की मेइजी होल्डिंग्स और जेजियांग बाइंगमेट साइंटिफिक टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री एंड ट्रेड कंपनी लिमिटेड पर जुर्माना नहीं लगाया गया है. शिन्हुआ ने एनडीआरसी के हवाले से इसकी वजह बताई है, "इन्होंने जांच में सहयोग किया, अहम सबूत दिए और खुद से चीजों को ठीक करने के लिए कदम उठाए."

मीड जॉन्सन, बायोस्टाइम, एबॉट और फोन्टेरा ने कहा है कि वो जुर्माने को चुनौती नहीं देंगे. एनडीआरसी की जांच का एलान होने के बाद मीड जॉन्सन, डेनॉन, और नेस्ले ने चीन में बच्चों की दूध की कीमतों में करीब 20 फीसदी की कटौती की थी.

जानकारों का कहना है कि यह जांच चीन की अपने घरेलू कंपनियों की बिक्री बढ़ाने की बड़ी योजना का भी हिस्सा हो सकती है. हालांकि उनका यह भी कहना है कि जुर्माने से प्रभावित कंपनियों की छवि पर कोई असर होगा, इसके आसार कम ही हैं. उनका कहना है कि यह भी मुमकिन है कि विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ जाए क्योंकि कीमतें नीचे आएंगी. मेबांक किम एंग रिसर्च की विश्लेषक जैकलीन का कहना है, "इसका घरेलू ब्रांडों पर लंबे समय के लिए असर होगा क्योंकि महंगे ब्रांड की कीमत नीचे आएगी. महंगे और घरेलू के बीच कीमत का फर्क घटने से लोग उन्हें विदेशी ब्रांड खरीदना चाहेंगे." जुर्माना लगने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी एक्सपोर्टर फोन्टेरा ने कहा है कि वह अपने सेल्स कर्मचारियों को अलग से ट्रेनिंग देगी. कंपनी एक बार मिल्क पाउडर में मिलावट के आरोपों से भी जूझ चुकी है जिसके बाद उसे चीन, हांगकांग और एशिया में दूसरी जगहों से सामान वापस लेना पड़ा था.

एनडीआरसी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि आयोग को पता चला कि कंपनियां दुकानदारों को कीमतें सुझा रही थीं और उन्हें कुछ खास शर्तों के पूरा होने पर विशेष लाभ का प्रस्ताव दे रही थीं. यह हरकतें खुदरा कीमत तय करने की मानक प्रक्रिया के खिलाफ है और इसी वजह से एनडीआरसी ने कदम उठाया. यह आयोग चीन के सबसे ताकतवर संगठनों में एक है यह बड़ी आर्थिक नीतियों के अलावा कीमतों पर भी नजर रखती है.

एनआर/एएम (रॉयटर्स, एएफपी)

DW.COM