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दुनिया

दुश्मन रिश्तेदार

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच रिश्ते बहुत जटिल हैं. अनचाहे बंटवारे के बाद युद्ध और फिर एकदम धुर विरोधी शासन प्रणाली. रिश्तों में बेहतरी का दूर दूर तक ठिकाना नहीं और एक होना तो सपना लगता है, वह भी बुरा.

कोरियाई प्रायद्वीप पर शीत युद्ध का असर 30 डिग्री देशांश पर देखा जा सकता है. पनमुंजोम की सीमा पर उत्तर कोरिया के सैनिक दो मंजिला इमारत में बैठ दूरबीन से चौकसी करते हैं. कुछ मीटर दूरी पर दूसरे हिस्से में शाही सैनिक गॉगल्स पहने देखे जा सकते हैं.

वे चार सफेद और तीन नीली चौकियों की चौकसी कर रहे हैं. एक सीमा की जो सीमेंट से बनी हुई है. बीच की बैरक के उत्तर कोरियाई लेफ्टिनेंट बताते हैं, "यहां इस टेबल पर 60 साल पहले युद्ध विराम समझौता किया गया था. हम यहां बैठे थे और अमेरिकी उस तरफ. उस दौरान काफी बुरा भला कहा गया और बहस हुई थी. सीमा रेखा टेबल के ठीक बीच से जाती है." इस बैरक में दोनों हिस्से के सैनिक अदल बदल कर तैनात होते हैं.

कोरियाई उन्माद
सीमा पर भूतहा माहौल कोरिया के बीच रिश्ता दिखाता है. चार किलोमीटर चौड़े सैनिक क्षेत्र में जाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के युद्ध विराम कमीशन की अनुमति लगती है. यह इलाका दुर्लभ जानवरों और पेड़ों के लिए संरक्षित इलाका बन गया है. वहीं दूसरी ओर दोनों तरफ कई सौ सैनिक, टैंक उत्तर कोरिया के दबे हुए हथियार और राकेट रोधी प्रणाली 50 किलोमीटर दूर बसी दक्षिण कोरियाई राजधानी सियोल तक आसानी से पहुंच सकती हैं और कुछ ही घंटों में उसे तबाह कर सकती हैं. ताकत के इस प्रदर्शन के बावजूद वहां दो करोड़ लोग रहते हैं. इन सालों में खासकर युवा भूल चुके हैं कि दोनों देशों के बीच कितने लंबे समय कोरिया युद्ध के बाद दुश्मन बने रहे.

पार्टी तानाशाही बनाम सैन्य शासन

50 के दशक में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम इस सुंग कोशिश में लगे रहे कि पार्टी स्टालिन के जादू से चले. दक्षिण कोरिया में 1960 की अप्रैल क्रांति के दौरान राष्ट्रपति री सिंग मान की भ्रष्ट सरकार गिरा दी गई. प्योंगयांग दक्षिण में समाजवादी विरोध का सामना करने की कोशिश करने लगा. यहां की स्थिति वियतनाम से प्रभावित थी. जहां गुरिल्ला नीति से पूंजीवादी दक्षिण को उखाड़ने की कोशिश हो रही थी. 60 के दशक के दूसरे हिस्से में उत्तर कोरिया पड़ोसी से इतना चिढ़ गया कि कुछ इतिहासकार दूसरे कोरिया युद्ध की बात करने लगे.

प्योंगयांग ने खुफिया तरीके से कम्यूनिस्ट पार्टी बनाई. सैनिक क्षेत्र के साथ ही सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई. 1968 में उत्तर कोरिया के 31 कमांडो ने सियोल में राष्ट्रपति के महल पर हमला किया कि सैन्य शासक पार्क चुंग ही और उनकी सरकार के लोगों को खत्म कर दिया जाए. इसी समय अमेरिकी युद्ध पोत पुएब्लो पर भी कब्जा कर लिया गया. कुछ महीने बाद 120 उत्तर कोरियाई पूर्वी तट पर पहुंचे कि दक्षिण कोरिया के गांवों से गुरिल्ला लड़ाके जुटा सकें.

शांतिपूर्ण जीवन

उत्तरी हिस्से के लोगों की सोच के विपरीत दक्षिण में उतने लोगों ने हथियार नहीं उठाए. सामान्य दक्षिण कोरियाई एंटी कम्यूनिस्ट ही रहा और उत्तर के वर्कर्स हेवन के प्रचार को शक की निगाहों से देखते रहे. इसलिए किम इल सुंग 70 के दशक तक ही यू टर्न कर पाए. इसी के बाद 1972 में, जर्मनी के पुनर्एकीकरण की तर्ज पर एक बैठक में कोरिया के दोनों हिस्सों ने भी जुलाई 1972 में कहा कि वे भी शांतिपूर्ण तरीके से एक होना चाहते हैं, लेकिन यह सिर्फ कहने के लिए ही था. हालांकि इससे दोनों के बीच रिश्तों के लिए एक खाका तो तैयार हुआ ही.

आपसी राजनीति को दोनों ने कभी नहीं स्वीकारा लेकिन तब से वह अलग अलग स्तरों पर संपर्क में भी नहीं हैं. इसने उत्तर को सैन्य कार्रवाई करने से बिलकुल नहीं रोका. 1983 में उत्तर कोरिया के एजेंटों ने राष्ट्रपति चुन डू व्हान की रंगून यात्रा के दौरान बम धमाका किया. 19 लोग मारे गए जिनमें दक्षिण कोरिया की कैबिनेट के चार सदस्य भी थे. सियोल में ओलंपिक खेलों से पहले एक कमांडो ने 1987 में दक्षिण कोरिया यात्री विमान में विस्फोट किया. आसमान में हुए इस धमाके ने 115 लोगों की जान ले ली. हाल ही में, 2010 के शुरुआत में उत्तर कोरिया के टॉरपीडो ने दक्षिण कोरिया के जहाज को डुबा दिया.

विजेता दक्षिण कोरिया

दक्षिण और उत्तर के बीच तंत्र की प्रतियोगिता अस्सी के दशक के आखिर ईस्ट ब्लॉक के खत्म होने के रुक गई. आर्थिक संगठन कैमेकॉन और सोवियत संघ के बार्टर सिस्टम के बगैर उत्तर कोरिया की नियोजित अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ जाती. नब्बे के दशक में बुरी कृषि नीति और भारी बारिश के कारण ने भूखमरी फैला दी. वहीं दक्षिण में पूंजीवादी दक्षिण में धान की खेती वाला दक्षिण कोरिया ह्युंडई, एलजी और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों वाला देश बन गया और आखिर वह गणतांत्रिक भी बन सका.

दक्षिण की आर्थिक ताकत और उत्तर की सैन्य धमकियां कोरियाई देशों के बीच संबंधों की दिशा तय करते हैं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति किम दाई युंग की नीतियों ने आपसी बेहतरी की उम्मीद तो जताई लेकिन 2000 में राष्ट्रपतियों की बैठक में ये हवा हो गई. उत्तर कोरिया सिर्फ अपने ही अस्तित्व का विचार कर रहा था. उनका परमाणु और राकेट कार्यक्रम दक्षिण पर दबाव डालने के उद्देश्य से बनाया गया. राष्ट्रपति ली म्युंग बाक ने इसीलिए रिश्ते आगे नहीं बढ़ाए. उनके बाद की राष्ट्रपति पार्क गेउन हे हालांकि युद्ध के 60 साल बाद फिर से संपर्क बनाने की कोशिश हो रही हैं.

रिपोर्टः फ्रित्ज मार्टिन/एएम

संपादनः एन रंजन

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