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दुनिया

दुनिया में 20 करोड़ बेरोजगार

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले साल दुनिया भर में बेरोजगारों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है जो इस साल भी जारी रहेगी. वित्तीय संकट की वजह से बढ़ रही बेरोजगारी से युवा लोग खास तौर पर प्रभावित हुए हैं.

पिछले साल दुनिया भर में बेरोजगारों की संख्या में 50 लाख की वृद्धि हुई. संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वे के अनुसार 2013 में कुल मिलाकर 20.2 करोड़ लोग बेरोजगार थे. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन आईएलओ का कहना है कि दुनिया भर में बेरोजगारी बढ़ रही है. इसकी वजह यह है कि 2008 के वित्तीय संकट के बाद से अर्थव्यवस्था बहुत धीमी गति से सुधर रही है. 20 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास पक्की नौकरी नहीं है.

खासकर युवा लोगों में बेरोजगारी दर बहुत तेजी से बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार 15 से 24 साल की उम्र के 7.5 करोड़ लोगों के पास नौकरी नहीं है. यह संख्या 2012 के मुकाबले 10 लाख ज्यादा है. विश्व भर में युवाओं की बेरोजगारी दर 13.1 फीसदी है. 2018 तक यह संख्या बढ़कर 21.5 करोड़ हो जाने का खतरा है. आईएलओ ने स्थिति से निबटने के लिए कदम उठाने की मांग की है.

आईएलओ के महासचिव गाय राइडर ने जेनेवा में सर्वे के नतीजे पत्रकारों के सामने पेश करते हुए कहा, "विश्वव्यापी बेरोजगारी के मामले में हम उफान पर हैं." और यह इसके बावजूद है कि आर्थिक विकास में थोड़ी बेहतरी आई है. आने वाले सालों में हालात और खराब होंगे. इसलिए राइडर ने रोजगार को अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के केंद्र में लाने की मांग की है

दक्षिण एशिया की अच्छी हालत

बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा उत्तरी अफ्रीका में है. आईएलओ के अनुसार इस इलाके में बेरोजगारी दर 12.2 फीसदी है. उसके बाद पश्चिम एशिया है जहां बेरोजगारी दर 10.9 फीसदी है. यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दूसरे औद्योगिक देशों में 8.6 फीसदी लोगों के पास काम नहीं है. आईएलओ के अनुसार सबसे अच्छी हालत दक्षिण एशिया की है जहां सिर्फ 4 फीसदी लोग बेरोजगार हैं.

संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने इस रिपोर्ट का प्रकाशन जनवरी के अंत में स्विट्जरलैंड के शहर दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक फोरम के मौके पर किया है. बुधवार को शुरू होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के टॉप मैनेजर और राजनीतिज्ञ हिस्सा लेते हैं और दुनिया की आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हैं.

इस साल दुनिया भर के 40 राज्य व सरकार प्रमुख आर्थिक फोरम में भाग ले रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि खासकर विकसित देशों की सरकारें ज्यादा लोगों को रोजगार दिलवाने के लिए अधिक काम कर सकती हैं और उन्हें करना भी चाहिए. उसके अनुसार मांग में कमी विश्वव्यापी बेरोजगारी की वजह है. बहुत से विकसित देशों में उद्यमों के अलावा निजी परिवार भी बचत करने में लगे हैं. इसके अलावा जिस गति से उत्पादकता बढ़ रही है, वेतन उस गति से नहीं बढ़ रहा है.

एमजे/आईबी (डीपीए, एएफपी)

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