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दुनिया

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार होगा भारत

सूजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने उम्मीद जताई है कि साल 2020 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बन जायेगा. कंपनी ने कहा कि वह भारतीय बाजार की वृद्धि में बड़ी भूमिका के लिये प्रतिबद्ध है.

भारत के यात्री कार बाजार में कंपनी की भारतीय इकाई मारुति सूजुकी इंडिया की हिस्सेदारी 50 फीसदी से भी अधिक है. कंपनी ने साल 2020 तक अपना कुल उत्पादन 20 लाख इकाई तक पहुंचाने के लिये गुजरात में अपने संयंत्र में निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. सूजुकी मोटर कॉरपोरेशन के कार्यकारी महाप्रबंधक और प्रबंधन अधिकारी (ग्लोबल ऑटोमोटिव ऑपरेशन) किंजी साइतो ने जेनेवा मोटर शो के दौरान कहा कि साल 2020 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बन सकता है और इस बढ़ोत्तरी के लिये कंपनी प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि कंपनी का पिछले कई दशकों से भारतीय बाजारों पर दबदबा बना हु्आ है. उन्होंने बताया कि जरूरत और मांग मुताबिक उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कंपनी की योजना बाजार में नये से नये मॉडल लॉन्च करने की भी है.

कंपनी के गुजरात संयंत्र की क्षमता सालाना 7.5 लाख गाड़ियां तैयार करने की है. कंपनी की दो अन्य इकाई गुरुग्राम और मानेसर में चल रही हैं जिनकी कुल उत्पादन क्षमता सालाना तकरीबन 15 लाख गा़ड़ियों के उत्पादन की है. अपने 15 नये मॉडल लाने की बात कंपनी पहले ही कर चुकी है. सूजुकी की योजना अगले वित्त वर्ष के दौरान चार नये मॉडलों को उतारने की है. पिछले कुछ सालों से कंपनी हर साल दो नये मॉडल बाजार उतारती रही है. साल 2018 में कंपनी की योजना घरेलू बाजार में थर्ड जेनरेशन स्विफ्ट उतारने की है. घरेलू बाजारों में इस वित्त वर्ष (अप्रैल-फरवरी) के दौरान कंपनी ने करीब 13 लाख गाड़ियां बेची थीं. साइतो ने बताया कि दुनिया भर में साल 2016 के दौरान मारुति सूजुकी ने तकरीबन 29 लाख गाड़ियां बेची हैं.

वहीं जर्मन कार निर्माता कंपनी डाइम्लर का दावा है कि मर्सिडीज बेंज कंपनी जल्द ही विश्व की सबसे बड़ी प्रीमियम कार निर्माता कंपनी बन जाएगी. 2016 में मर्सिडीज पर करीब 20 लाख से भी अधिक लोगों ने विश्वास जताया है. भारत में भी लक्जरी कारों की मांग बीते सालों के दौरान खूब बढ़ी है. फिर भी भारत के मध्यमवर्ग में तेजी से फैलते उपभोक्तावाद और खर्च करने के लिए मौजूद डिस्पोजेबल इंकम के कारण ही इस वर्ग में कारों की बिक्री सबसे तेजी से बढ़ी है. भारतीय उपभोक्ता अब भी प्राइस-सेंसिटिव यानि कारों की कीमत को लेकर बेहद संवेदनशील माना जाता है, जिसके कारण सभी कार निर्माता भारतीय बाजार में पकड़ बनाने के लिए आपस में भी संघर्ष कर रहे हैं.     

एए/आरपी (पीटीआई)

 

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