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दुनिया

दीवार बनाने की ट्रेनिंग

दीवारों के बगैर कोई मकान नहीं खड़ा हो सकता. और दीवारें बनाने वाले राज मिस्त्री जर्मनी में ऐसे ही नहीं बन जाते. इसके लिए भी होती है ट्रेनिंग, जिसमें सीमेंट मिलाने और ईंट लगाने के अलावा भी काफी कुछ सिखाया जाता है.

राज मिस्त्री के तौर पर काम करना यानि टीम में काम करना. क्योंकि कोई मकान बिना टीम के नहीं बनाया जा सकता. इसलिए अच्छे रिजल्ट के अलावा ट्रेनिंग में जरूरी है टीम में अच्छे से काम करने की प्रैक्टिस.

जल्दी शुरुआत

राड मिस्त्री की ट्रेनिंग लेने वालों का दिन बहुत जल्दी शुरू हो जाता है. लेकिन ट्रेनिंग लेने वाले मार्लेन ब्लांडो को इससे कभी तकलीफ नहीं हुई. रोज सुबह साढ़े छह बजे वह काम पर पहुंच जाते हैं. उनकी कंपनी फिलहाल एक गोदाम बना रही है. मार्लोन का काम है स्टील के रॉड से बास्केट बनाना. इसे बाद उसे एक खंभे में लगाया जाएगा और इस पर सीमेंट को तौला जाएगा.

दो साल से ब्लांडो राज मिस्त्री की ट्रेनिंग कर रहे हैं. वह बताते हैं, "मेरा पूरा परिवार ही राज मिस्त्रियों का था. मेरे दादा, चाचा दोनों ही राज मिस्त्री थे. इसलिए मेरे लिए बहुत जल्दी साफ था कि मैं भी इसी काम में जाऊंगा." उन्होंने एक ऐसी कंपनी में ट्रेनिंग शुरू की जो पूरी इमारत बना कर बेचती है. इसमें वह पूरा काम सारी बारीकियों के साथ अच्छे से सीख सकते हैं.

कुशलता जरूरी

मार्लोन बताते हैं, "कई लोगों को लगता है कि दीवार बनाना बहुत आसान काम है. मैं भी ऐसा ही सोचता था. लेकिन मेरी पहली कोशिश में दीवार तिरछी हो गई." अब वह जानते हैं कि दीवार सीधी कैसे बनाई जाती है. कैसे सीमेंट मिलाया जाता है और छत कैसे डाली जाती है. बाहर और अंदर प्लास्टर करते समय क्या क्या ध्यान रखना पड़ता है. अब उन्हें अलग अलग पत्थरों, ईंटों के बारे में पता है और उन्हें मिक्स करने की ट्रिक भी. ट्रेनिंग के दूसरे और तीसरे साल में वह सीधे कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर सकते हैं.

Marlon Blandow

राज मिस्त्री के राज सीखते ब्लांडो

कंस्ट्रक्शन कंपनी ट्रेनी के रिजल्ट पर ध्यान नहीं देती कि उसे किस विषय में कितने अंक मिले हैं. बल्कि देखा जाता है कि वह कितना विश्वसनीय है, और वह टीम में काम कर सकता है या नहीं. लड़ाई करने वाले की उन्हें कोई जरूरत नहीं है क्योंकि टीम को हर दिन साथ में मिलजुल कर काम करना होता है, इसलिए वहां शांति जरूरी है. उन्हें समझना होता है कि घर कैसा बनाना है.

बहुपक्षी ट्रेनिंग

ट्रेनिंग के दौरान राज मिस्त्री दीवार से जुड़ी चीजों के अलावा छत बनाना, टाइल्स लगाना, सब सीखते हैं. ये जरूरी भी है क्योंकि इससे एक राजमिस्त्री दूसरों की नजर से भी देख सकता है कि काम में क्या मुश्किलें होती हैं और किस तरह उनसे निबटा जा सकता है. जर्मनी में पहले राज मिस्त्री ही सब करता था लेकिन आज ऐसा नहीं होता. दिलचस्प ट्रेनिंग के बावजूद आज भी इस पेशे में महिलाओं की कमी है. 2012 के आंकड़ों के मुताबिक 4,000 राजमिस्त्रियों में महिलाओं की संख्या सिर्फ दो दर्जन ही थी.

इटली में ये ट्रेनिंग करना और रोचक होता है क्योंकि उन्हें ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण का काम भी सीखने को मिलता है. कंपनियां हाल के समय में इस ट्रेनिंग और काम के लिए प्रशिक्षुओं को पैसे भी देती है. लोअर सेक्सनी में इस काम के लिए असिस्टेंट को प्रति घंटा 17 यूरो मिलते हैं. यानि महीने में कुल आय करीब 3,000 यूरो के आस पास हो जाती है. ट्रेनी को भी अच्छे पैसे मिल जाते हैं. ब्लांडो को प्रति माह 800 यूरो के आसपास मिल जाते हैं.

रिपोर्टः रामोना श्ले/एएम

संपादनः महेश झा

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