1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

दिवालिया होने से बचा साइप्रस

साइप्रस ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए समझौता कर लिया है. समझौते के तहत अमीर रूसी ग्राहकों और बिना बीमा वाले बैंक ग्राहकों को भारी नुकसान हो सकता है.

साइप्रस की बैंकिंग प्रणाली बर्बादी के कगार पर थी जब रविवार को देश के राष्ट्रपति निकोस आनास्तासियादेस ईयू नेताओं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के प्रमुख से मिले. रातों रात हुई डील में सरकारी बैंक लाइकी को बंद कर दिया जाएगा और एक लाख यूरो से कम पैसों वाले खातों को बैंक ऑफ साइप्रस में लाया जाएगा. दोनों बैंकों में एक लाख यूरो से ज्यादा पैसे वाले खाते फ्रीज किए जाएंगे. इन पैसों से लाइकी बैंक के कर्ज को कम करने की कोशिश की जाएगी और बैंक ऑफ साइप्रस में डिपॉजिट और शेयरों के जरिए पैसे सुरक्षित किए जाएंगे.

लाइकी बैंक के उन ग्राहकों से 4.2 अरब यूरो आने की उम्मीद है जिनके डिपॉजिट पर बीमा नहीं है. यूरो वित्त मंत्रियों के गुट यूरोग्रुप के प्रमुख येरून डिसेलब्लूम के मुताबिक लाइकी को पूरी तरह बंद किया जाएगा और बहुत सारी नौकरियां भी इसमें जाएंगीं.

सुधार की उम्मीद

Zypern Nikosia Protest

सरकार पर भरोसा नहीं- साइप्रस के नागरिक

यूरोपीय संघ के एक प्रवक्ता का कहना है कि साइप्रस के बाकी बैंकों के डिपॉजिट पर टैक्स नहीं लगाए जाएंगे. यूरोग्रुप के डिसेलब्लूम ने कहा, "कार्यक्रम का आधार होगा वित्तीय तौर पर देश को संगठित करना, मूलभूत सुधार लाना और निजीकरण करना. अधिकारी वित्तीय सेक्टर की स्थिरता को बनाए रखने के लिए खास कोशिश करते रहेंगे और साथ ही देश के दो सबसे बड़े बैंकों को पुनर्व्यवस्थित करने की पूरी कोशिश करेंगे. इससे पूरे बैंकिंग सेक्टर के डिपॉजिट पर कर लागू करने से बचा जा सकेगा." लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि देश की दो सबसे बड़ी बैंकों के बड़े ग्राहकों को काफी नुकसान होगा. पिछले हफ्ते यूरोपीय संघ और साइप्रस के बीच डील में ईयू ने साइप्रस के बैंकों की सारी डिपॉजिटों पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया था. साइप्रस सरकार के प्रवक्ता क्रिस्टोस स्टिलियानिदेस ने कहा, "हम अव्यवस्थित तरीके से दिवालिया होने को रोक पाए हैं. अगर ऐसा होता तो साइप्रस को यूरो क्षेत्र से बाहर निकलना होता और इसका नतीजा कुछ भी हो सकता था."

बिना बीमा के ग्राहकों को होने वाले नुकसान के बारे में साइप्रस के प्रवक्ता ने कहा कि इस वक्त नुकसान के बारे में आंकड़ा देना मुमकिन नहीं है लेकिन यह करीब 30 प्रतिशत हो सकता है. जर्मनी के वित्त मंत्री वोल्फगांग शॉएब्ले ने कहा है कि साइप्रस के नेताओं को नए समझौते पर वोट करने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि उन्होंने बैंकों की मुश्किलों को सुलझाने के लिए पहले से ही कानून पारित कर लिया है. साइप्रस के नेता डील से खुश नहीं हैं लेकिन उनका मानना है कि डील नहीं होने पर उनके देश की हालत और खराब हो सकती थी. केंद्रीय बैंक के अधिकारी रहे आफ्कसेंतिस आफ्कसेंतियू ने कहा कि यह साइप्रस के लिए नया दिन है और दो तीन सालों में देश दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा.

समझौते पर राजी होने से पहले साइप्रस के राष्ट्रपति आनास्तासियादेस ने कहा था कि अगर उनके देश पर ज्यादा दबाव डाला जाएगा तो वह इस्तीफा दे देंगे. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ और ईयू की मांग थी कि साइप्रस अपने बैंकों से 5.8 अरब यूरो पैदा करे जिसके बदले में उसे 10 अरब का कर्जा मिलेगा. साइप्रस को मई में आपातकालीन फंड की पहली किश्त मिलेगी.

राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति ने साइप्रस की अंतरराष्ट्रीय छवि बनाए रखने की कोशिश की है, जिसके तहत वह साइप्रस को एक वित्तीय केंद्र के तौर पर स्थापित करना चाहते थे. लेकिन फ्रांस सहित यूरोपीय संघ के कई देशों का मानना था कि साइप्रस एक "कैसीनो" अर्थव्यवस्था है जो रूसी अमीरों के पैसों पर जीता है. साइप्रस के बैंकों के ग्राहक ज्यादातर रूस और ब्रिटेन के अमीर व्यापारी होते हैं. पिछले हफ्ते साइप्रस के बैंक बंद रहे और वहां के केंद्रीय बैंक ने एटीएम से पैसे निकालने पर रोजाना 100 यूरो की सीमा लागू की थी ताकि एटीएम में लोगों की भीड़ कम हो. साइप्रस के साथ डील के बाद यूरो मुद्रा का भाव स्टॉक बाजार में बढ़ा भी है.

रिपोर्टः मानसी गोपालकृष्ण (रॉयटर्स)

संपादनः आभा मोंढे

DW.COM

संबंधित सामग्री