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दुनिया

दिल्ली में हिंसक प्रदर्शन

दिल्ली में बलात्कार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में कुछ अराजक तत्वों भारी उपद्रव किया. ऐसी रिपोर्टें हैं कि हुड़दंगियों ने कुछ महिलाओं के साथ भी छेड़खानी की. पुलिस ने इंडिया के पास प्रदर्शनकारियों को डंडे के जोर पर खदेड़ा.

शनिवार को राष्ट्रपति भवन के बाहर प्रदर्शन करने के बाद रविवार को रेल भवन के सामने प्रदर्शनकारी जमा हो गये. दोपहर के वक्त प्रदर्शनकारी जैसे ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास की तरफ बढ़ने लगे, पुलिस ने पानी की तेज बौछारों से उन्हें खदेड़ना शुरू कर दिया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस दौरान पत्थरबाजी भी हुई. पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे. प्रदर्शनकारी गैंगरेप मामले की तेज सुनवाई और दोषियों को फांसी दिये जाने की मांग कर रहे हैं.

इंडिया गेट पर भी प्रदर्शन हुए.  दोपहर बाद वहां राजनीतिक पार्टियों से जुड़े कुछ कार्यकर्ता पहुंचे. उनके साथ काफी भीड़ भी थी. इसी भीड़ ने कुछ देर बाद उत्पात मचाना शुरू कर दिया. भारतीय मीडिया के मुताबिक उपद्रव के दौरान कुछ महिलाओं से छेड़खानी भी की गई. वहां दिल्ली की मुख्यमंत्री के बेटे और कांग्रेस के सांसद संदीप दीक्षित को रोक दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने दीक्षित की कार में तोड़फोड़ भी की. बढ़ते विरोध के बीच रविवार को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कुछ प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें ठोस कार्रवाई का भरोसा दिया है.

दिल्ली में बीते रविवार को चलती बस में 23 साल की छात्रा से छह लोगों ने बलात्कार किया. आरोपियों ने छात्रा और उसके पुरुष मित्र की लोहे की रॉडों से पिटाई भी की. छात्रा का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है. पिटाई की वजह से उसके पेट में काफी चोटें आई हैं. डॉक्टरों ने आंतों का ज्यादातर हिस्सा निकाल दिया है. डॉक्टरों के मुताबिक इलाज का असर हो रहा है, लेकिन छात्रा की हालत अब भी गंभीर बनी हुई हैं. शनिवार रात छात्रा ने पहली बार पुलिस को बयान भी दिया.

दिखावे और हकीकत में फर्क

भारत में राजनीतिक रूप से सबसे शक्तिशाली हस्ती कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं. विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज हैं. कई राजनीतिक पार्टियों में महिलाएं शीर्ष पर हैं, लेकिन इसके बावजूद देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं.

अफगानिस्तान, कांगो और पाकिस्तान के बाद भारत को संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश घोषित किया हुआ है. फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक भारत में आए दिन महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार होती है. हर घंटे एक महिला बलात्कार का शिकार होती है. छेड़ाखानी के तो एक घंटे में आठ मामले होते हैं. राजधानी दिल्ली भी दुनिया में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित कहे जाने वाले शहरों में है. दिल्ली में हर 18 घंटे में बलात्कार का एक मामला सामने आता है. बीते साल दिल्ली में बलात्कार के 550 मामले दर्ज हुए. लेकिन बीते रविवार की घटना ने आक्रोश की लहर पैदा की है.

ठोस फैसले का अभाव

इस घटना पर भारतीय संसद में भी बहस हुई. कई सांसदों ने बलात्कार के दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की. दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले को खुद संज्ञान में लेकर दिल्ली पुलिस को सख्त फटकार भी लगाई है. अदालत खुद जांच की निगरानी कर रही है.

लेकिन हैरान करने वाली बात है कि इस घटना के बाद भी भारत में पुलिस सुधार बिल पर कोई चर्चा नहीं हो रही है. भारत के ज्यादातर राज्यों में पुलिस राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं. केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं. सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता अक्सर आरोप लगाते हैं कि सरकारी नियंत्रण की वजह से पुलिस नेताओं के दबाव में जाती है. भारत में लंबे समय से पुलिस सुधारों की मांग होती आ रही है, लेकिन पूरी बात संसद में अटकी हुई है.

रिपोर्ट: ओंकार सिंह जनौटी

संपादन: ईशा भाटिया

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