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दुनिया

दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर सवाल

दिल्ली में एक महिला के साथ हुए कथित बलात्कार के आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है और दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जा रहा है. टैक्सी कंपनी ऊबर पर दिल्ली में प्रतिबंध.

अंतरराष्ट्रीय टैक्सी कंपनी ऊबर के ड्राइवर द्वारा पिछले हफ्ते एक 27 साल की युवती के बलात्कार के मामले से राजधानी में एक बार फिर गुस्सा है. ड्राइवर के पहले भी यौन हिंसा के मामले में लिप्त होने की खबर के बाद सवाल यह खड़ा हो रहा है कि कंपनी में उसे रखने से पहले क्या उसकी पृष्ठभूमि की ठीक से जांच की गई थी.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने कंपनी से जांच में पूरे सहयोग की मांग की है. अगर जांच में पाया गया कि कंपनी ने ड्राइवर की पृष्ठभूमि के बारे में जरूरी छानबीन नहीं की गई थी तो दिल्ली में कंपनी का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है. दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर मधुर वर्मा के मुताबिक, "ऊबर द्वारा की गई हर गलती की जांच होगी और कानूनी कार्रवाई होगी." मधुर वर्मा ने बताया कि चालक को तीन साल पहले एक महिला के बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया था लेकिन वह बाद में छूट गया.

अंतरराष्ट्रीय टैक्सी कंपनी ऊबर का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और वे जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे. कंपनी ने कहा, "यह एक जघन्य अपराध है. हम पीड़िता के साथ हैं जिसने इन हालात में भी जबरदस्त हिम्मत दिखाई." ऊबर के सीईओ ट्रैविस कैलानिक के मुताबिक, "हम सरकार के सिस्टम में वाणिज्यिक परिवहन लाइसेंसिंग कार्यक्रम में बैकग्राउंड चेक को शामिल कराने में पूरी मदद करेंगे." फिलहाल वाणिज्यिक परिवहन लाइसेंसिंग कार्यक्रम में चालकों की पृष्ठभूमि की जांच का प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कंपनी दिल्ली और देश के अन्य शहरों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देगी.

पुलिस के मुताबिक शुक्रवार की रात यह घटना तब हुई जब युवती टैक्सी में वसंत विहार से अपने घर सराय रोहिल्ला जा रही थी. पुलिस का कहना है कि टैक्सी में सैटेलाइट लोकेशन उपकरण जीपीएस नहीं था. कंपनी के पास ड्राइवर शिव कुमार यादव तक पहुंचने का सिर्फ एक ही माध्यम था, उसके मोबाइल पर ऊबर का ऐप. लेकिन यादव ने अपना मोबाइल भी बंद कर दिया था. अगली सुबह महिला द्वारा पुलिस में शिकायत के साथ ही पुलिस ने तेजी दिखाई और ड्राइवर को मथुरा से गिरफ्तार कर लिया. जिस टैक्सी में कथित रूप से बलात्कार हुआ वह ड्राइवर के ही नाम पर है.

इस हादसे ने 16 दिसंबर 2012 को हुए सामूहिक बलात्कार मामले के बाद महिला सुरक्षा इंतजामों में हुई तब्दीलियों पर एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है. राजधानी में जगह जगह जारी प्रदर्शनों में लोगों के सवाल हैं कि क्या दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए वाकई कोई ठोस कदम उठाए गए हैं. निर्भया मामले के बाद कानून में की गई सख्ती क्या इस तरह के मामलों को रोक पाई है? मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी गर्म प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. सवाल उठ रहे हैं कि यात्री आखिर कैसे विश्वास करें कि उनकी सुरक्षा के दावे करने वाली टैक्सी कंपनियां उनके लिए सुरक्षित हैं.

ऊबर के पहले अमेरिका में भी अपने ड्राइवरों की जांच में कोताही को लेकर आलोचना होती रही है. सैन फ्रांसिस्को में एक 6 साल की बच्ची की टैक्सी से टक्कर से मौत के मामले में कंपनी ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. कंपनी के ड्राइवरों के खिलाफ नस्ली भेदभाव, हाथापाई और यौनहिंसा के आरोप जैसे मामले भी सामने आए हैं. फिर भी सैन फ्रांसिस्को की यह कंपनी अब तक निवेशक जुटाने में कामयाब रही है. 40 अरब डॉलर तक के निवेश ने कंपनी के भारत जैसे विस्तृत बाजार में रास्ते खोल दिए.

एसएफ/एमजे (रॉयटर्स)

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