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दुनिया

दिल्ली में बढ़ता पानी का संकट

हर साल मीनू फाके के घर जब पानी खत्म हो जाता है तो वह भी वही काम करती हैं जो उनके मध्यवर्गीय पड़ोसी करते हैं. वह टैंकर माफिया को फोन करती हैं. ताकि घर का काम तो चल सके.

एक घंटे के भीतर पानी के टैंकर के साथ एक शख्स आता है. टैंकर में अवैध तरीके से निकाला गया भूजल होता है. गर्मी से लेकर जाड़े की शुरुआत तक भारत की राजधानी दिल्ली में पानी का संकट चरम पर होता है. और इस दौरान शहर के टैंकर माफिया का कारोबार तेजी पकड़ लेता है. एक अनुमान के मुताबिक करीब 2000 गैरकानूनी पानी के टैंकर दिल्ली की सड़कों पर दौड़ते हैं. लाखों लोगों की जिंदगी के लिए अहम पानी जब नलकों में नहीं आता, तो यही टैंकर उनकी प्यास बुझाते हैं और यह बड़ी समस्या का संकेत है जो शहर के बेकार पानी की व्यवस्था की तरफ इशारा करते हैं.

पानी के टैंकर सस्ते नहीं होते हैं लेकिन कुछ दिल्लीवासियों के लिए कोई और विकल्प नहीं. मार्केटिंग एक्जिक्यूटिव फाके कहती हैं, "आपको पानी की जरूरत होती है और आप इसके लिए कितना भी खर्च कर सकते हैं."

सिर्फ फाके ही नहीं, लाखों और लोग भी पानी की समस्या से दो चार हैं. पानी का संकट जहां बड़ी बड़ी कॉलोनी में रहने वाले लोगों को सताता है, वहीं बस्तियों में रहने वाले भी इससे अछूते नहीं. दिल्ली में हर दिन 16 करोड़ गैलन कम पानी की आपूर्ति होती है. ज्यादातर निवासियों को कुछ ही घंटे नलों से पानी मिलता है, जबकि एक चौथाई के पास नलों की भी सुविधा नहीं. दशकों से दिल्ली में पानी की समस्या है.

एक तो ढंग की योजना नहीं और दूसरे हाल के दिनों में दिल्ली की आबादी भी तेजी से बढ़ी है. इस कारण समस्या और गंभीर हो गई है. 1991 में दिल्ली की आबादी 90 लाख थी जो अब बढ़कर 1.7 करोड़ हो गई है. दिल्ली के महंगे इलाकों में भी जब पानी की सप्लाई होती है तो लोगों को मोटर चलानी पड़ती है ताकि टंकियों में पानी भर जा सके और सप्लाई भी सिर्फ एक ही घंटा होती है.

हालांकि सबसे जरूरी समस्या ऐसे इलाकों में पानी पहुंचाना है जहां अवैध निर्माण धड़ल्ले से हुआ है. ऐसी इमारतों में शहर की 40 फीसदी आबादी रहती है और ज्यादातर के पास पानी का कनेक्शन नहीं. दिल्ली जल बोर्ड हर दिन 900 टैंकरों को भीड़ भाड़ वाली सड़कों पर भेजता है. कई इलाकों से तो हर एक मिनट पर पानी के टैंकर गुजरते हैं. आम तौर पर टैंकर 15 मिनट के लिए एक जगह रुकते हैं. पानी के टैंकर आते ही आस पास लोग जमा हो जाते हैं और कई बार तो पानी भरने को लेकर झगड़ा भी होने लगता है.

एए/एजेए (एपी)

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