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दुनिया

दिल्ली में प्रदूषण हर दिन ले रहा है 80 जानें

एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में सालाना 10,000 से 30,000 जानें जा रही हैं. प्रदूषण हर दिन भारत की राजधानी में औसतन 80 लोगों की जान ले रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ की एक नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 13 भारत के शहर हैं. इनमें राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है. इसके बाद पटना, रायपुर और ग्वालियर का नंबर आता है. बाकी बचे शहरों में तीन पाकिस्तान के, दो बांग्लादेश के, एक कतर और एक ईरान का शहर है. अब एक ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर दिल्ली में प्रदूषण की समस्या की ओर ध्यान खींचा है. एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नॉलॉजी पत्रिका में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में अधिकतर मौतें दिल की बीमारी और स्ट्रोक के कारण होती हैं. दिल्ली की हवा में पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 की मात्रा प्रति घन मीटर 150 माइक्रोग्राम है. यह देश में निर्धारित सीमा का चार गुना और डब्ल्यूएचओ की तय सीमा का 15 गुना है. रिपोर्ट के अनुसार पीएम 2.5 पर काबू पा कर दिल्ली में प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों को 45 से 85 फीसदी तक कम किया जा सकता है.

दुनिया भर में वायु प्रदूषण का ब्योरा लेती इस रिपोर्ट में चीन और भारत पर खास ध्यान दिया गया है. रिपोर्ट में चेतावनी भरे स्वर में कहा गया है कि अगर ये दोनों देश प्रदूषण पर नियंत्रण कर पाएं, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है. रिपोर्ट के अनुसार दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं करते और इस कारण प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है. साथ ही यह भी कहा गया है कि वाहनों की बढ़ती संख्या, बिजली के लिए कोयले से चलने वाले संयंत्रों पर निर्भरता और सड़कों पर लकड़ी और कूड़ा जलाने जैसी आदतों के कारण हालात में सुधार की कोई उम्मीद भी नहीं है, लेकिन अगर स्थिति को और बिगड़ने ना दिया जाए, तो कम से कम भविष्य में प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण मरने वाले लोगों की संख्या को और बढ़ने से रोका जा सकता है.

Joshua Apte führt Luftmessungen in Neu Delhi durch 25.11.2014

दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा नापते जोशुआ आप्टे

रिपोर्ट के अनुसार यदि पूरी दुनिया विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानदंडों के अनुरूप प्रदूषण के स्तर को कम करे, तो हर साल 21 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है. मौजूदा मृत्यु दर को बरकरार रखने के लिए भारत और चीन को पीएम 2.5 की मात्रा 20 से 30 फीसदी घटानी होगी. हालांकि इसके बाद भी ये दोनों देश डब्ल्यूएचओ की तय सीमा तक नहीं पहुंच पाएंगे. रिपोर्ट के मुख्य लेखक और टेक्सास यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जोशुआ आप्टे का कहना है, "इन देशों की आबादी बूढ़ी हो रही है, इसलिए वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों का असर और भी गहरा होगा."

हालांकि रिपोर्ट के केंद्र में एशिया के विकासशील देश हैं, पर साथ ही पश्चिमी देशों को भी पीएम 2.5 की मात्रा में कमी लाने की सलाह दी गयी है. रिपोर्ट के सहलेखक और मिनेसोटा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जूलियन मार्शल का कहना है, "सबको लगता है कि पश्चिम में हवा बिलकुल साफ है. लेकिन यहां हवा को और साफ कर स्वास्थ्य संबंधी फायदे मिल सकते हैं. हम यह याद दिलाना चाहते हैं कि वायु प्रदूषण से पश्चिम में भी सेहत पर बुरा असर पड़ता है." उन्होंने कहा कि अमेरिका, कनाडा और यूरोप को भी हवा में पीएम 2.5 की मात्रा कम करने की ओर ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

आईबी/एमजे (एपी)

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