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दुनिया

दिल्ली में पहली महिला मुख्य न्यायाधीश

भारत में महिलाओं का हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट का न्यायाधीश बनना अब कोई नई बात नहीं, लेकिन राजधानी दिल्ली के हाईकोर्ट में पहली बार एक महिला मुख्य न्यायाधीश बनी हैं. यह सम्मान मिला है गोरला रोहिणी को.

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की जस्टिस जी रोहिणी ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश की शपथ ली. 1966 में दिल्ली उच्च न्यायालय के गठन के बाद वे पहली महिला हैं जो मुख्य न्यायाधीश बनी हैं. उपराज्यपाल नजीब जंग ने राजनिवास में आयोजित समारोह में 59 वर्षीया जी रोहिणी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई.

दिल्ली उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद, एनवी रमन के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हो जाने के बाद से खाली था. न्यायाधीश बीडी अहमद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर हाई कोर्ट का काम काज देख रहे थे. जी रोहिणी की नियुक्ति के बाद उच्च न्यायालय में कुल 40 न्यायाधीशों में महिला न्यायाधीशों की संख्या दस हो गई है.

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 12 अप्रैल को जस्टिस रोहिणी को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रुप में नियुक्ति को मंजूरी दी थी.

जी रोहिणी ने अपने करियर की शुरुआत विधि संवाददाता के रुप में की थी. मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले वे आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश थीं. 2001 में वह आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में अस्थाई न्यायाधीश नियुक्त हुईं. 1976 में विज्ञान विषय में स्नातक की पढाई के बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की पढाई की.

जस्टिस रोहिणी ने दिसंबर 1980 में वकालत शुरू की और बाद में आंध्र प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष भी रहीं. 1995 में उन्हें हाई कोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया. उन्हें 2001 में आंध्र हाई कोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्ति किया गया और 2002 में वे स्थाई जज बनीं.

एमजे/आईबी (वार्ता)

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