1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

दिल्ली में अफगान सेक्स रैकेट

वह अपना नाम दिलजान बताती है. सुनहरे बाल और हरी आंखें. अपने गोल चेहरे पर मुस्कान लाती हुई कहती है, "अगर आपके पास पैसा है, तो मैं पूरी रात आपकी हो सकती हूं." वह किसी पश्चिमी देश की नहीं, अफगान है.

दिलजान एक रात के 20,000 से 90,000 रुपये लेती है. हालांकि भारत में अब भी रूस और यूक्रेन की सेक्स वर्करों का बोलबाला है, लेकिन दिलजान जैसी अफगान बालाओं ने उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है.
घर पर वह एक सीधी सादी इस्लामपरस्त औरत थी, जो हिजाब पहनती थी और हर सुबह उठ कर फज्र की नमाज पढ़ती थी. इसके बाद मां के साथ रसोई में खाना तैयार करती थी. इसके बाद 2001 का युद्ध आ गया. उसके परिवार को कंधार से काबुल भागना पड़ा. वहां किराए के एक मकान में उसे रहना पड़ा.
बुरा सपना उस दिन शुरू हुआ, जब एक शख्स ने दिलजान का बलात्कार किया. उस वक्त वह बाजार से लौट रही थी. उसने धमकी भी दी कि अगर किसी को यह बात बताई गई, तो उसे जान से मार दिया जाएगा. उसी महीने एक दूसरे शख्स ने भी बलात्कार किया, उसने भी ऐसी ही धमकी दी.
2011 में एक महिला उसके पास आई और उससे कहा कि दिल्ली के एक बड़े होटल में उसे वेटर का काम मिल सकता है. वह उछल पड़ी. उस औरत ने दिलजान के लिए पासपोर्ट और वीजा का इंतजाम किया और एक विमान पर चढ़ा दिया. दिल्ली में बताया गया कि नौकरी अब नहीं है. इसके बाद वह सेक्स के कारोबार में आ गई, "छह दूसरी अफगान औरतें पहले से ही इस काम में लगी थीं."

Afghanistan Diskriminierung von Frauen in der afghanischen Gesellschaft

अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ जुल्म


भारत की द वीक पत्रिका की खोजी रिपोर्ट में सीमा के दोनों तरफ लोगों से बात की गई और पता चला कि ऐसे दर्जनों मामले हैं. अफगानिस्तान सेक्स कारोबार के लिए स्रोत और गंतव्य बनता जा रहा है. किसी को नहीं पता कि कितनी अफगान औरतें इस दलदल में धकेली गई हैं. ड्रग कारोबार की तरह यह धंधा भी लुका छिपा के किया जाता है. दिलजान जैसी औरतों को कई बार उनके दलाल धोखा देते हैं और मानव तस्करों के हवाले कर देते हैं. दूसरों को अगवा कर लिया जाता है, बलात्कार होता है और सेक्स कारोबार में धकेल दिया जाता है. अमेरिका ने अफगानिस्तान को मानव तस्करी के मामले में "टीयर 2" में रखा है.
कई साल के युद्ध ने लाखों अफगान को बेघर किया और इसके बाद ही मानव तस्करी भी बढ़ी. पुरानी गरीबी और महिलाओं की बदतर हालात ने महिलाओं को और मुश्किल में डाल दिया. दूसरा मामला अफगानिस्तान के भूगोल का है. वह छह पड़ोसियों से घिरा है, जिनमें ईरान, पाकिस्तान और ताजिकिस्तान भी हैं. इनमें से कई सीमाओं की निगरानी लगभग असंभव है क्योंकि वहां पहाड़ों और पठारों का जाल सा बिछा है.

Afghanistan Help e.V. in Herat

महिलाओं का पुनर्वास आसान नहीं


अफगान महिला ट्रेनिंग और विकास संस्थान की निदेशक पलवाशा साबूरी का कहना है कि हर साल सैकड़ों महिलाओं की तस्करी हो रही है. इसके बाद भी सरकार इस पर कोई कदम नहीं उठा रही है. उनका दावा है कि पिछले दो साल में उनकी संस्था ने 319 औरतों और बच्चों को बचाया है. साबूरी का कहना है, "इनमें से ज्यादातर के साथ बुरी तरह यौन उत्पीड़न हुआ." अफगान सरकार ऐसी औरतों के लिए शिविर चलाती है और फिलहाल आठ जगहों पर बलात्कार और तस्करी की शिकार 727 औरतों का पुनर्वास चल रहा है.
साल 2007 में ऐसा पहला शिविर बनाया गया, जहां सुरक्षा, छत, ट्रेनिंग और सेहत की जानकारी दी जाती है. कई शिविरों को स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन चला रहे हैं. जिन पीड़ितों को इन शिविरों में जगह नहीं मिल पाती है, उन्हें कई बार जेल में जाना पड़ता है. अफगन सरकार के महिला विभाग की निदेशक जकिया बरयालती का कहना है, "हमारे पास पीड़ितों की पूरी सेना है."

अगला पेज...