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वर्ल्ड कप

दिल्ली ने दम दिखा दिया: फेनेल

चकाचौंध कर देने वाले लेजर शो और संगीत लहरियों के साथ नई दिल्ली कॉमनवेल्थ खेल 2010 पर पर्दा गिर गया. अब यह पर्दा ग्लासगो में उठेगा. खट्टे मीठे अनुभवों से शुरू हुए भारत के अब तक के सबसे बड़े खेल आयोजन का खुशनुमा समापन हुआ.

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समापन समारोह बहुत सादा रहा. उद्घाटन के दौरान जिस तरह का रंग बिरंगा और अद्भुत समारोह हुआ था वैसा कुछ गुरुवार रात देखने को नहीं मिला. हालांकि लेजर शो ने इसे भी शानदार बना दिया.

भारत की राजधानी दिल्ली के आसमान पर कई रंगों की लेजर किरणों ने शानदार दृश्य पेश किया. 160 मिनट चले इस समारोह में उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी मौजूद रहे. इन सभी हस्तियों की मौजूदगी में दिल्ली के उप राज्यपाल तेजेंद्र खन्ना ने कॉमनवेल्थ झंडा ग्लासगो के गवर्नर को सौंप दिया.

इस मौके पर भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा कि भारत के लिए यह समापन नहीं बल्कि खेलों की नई शुरुआत है.

इससे पहले समारोह की शुरुआत वेद मंत्रों के साथ हुई. उत्तर पूर्वी भारत के राज्यों से आए कलाकारों ने यहां अपनी सांस्कृतिक धरोहर की झलक पेश की. सेना के तीनों अंगों ने भी करतब दिखाए. सेना के बैंड पर बजीं देशभक्ति गीतों की धुनों ने भी समा बांध दिया.

भारत के लिए ये खेल अब तक के सबसे सफल खेल साबित हुए. उसके खिलाड़ियों ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज मेडल जीते. ऑस्ट्रेलिया 74 गोल्ड, 55 सिल्वर और 48 ब्रॉन्ज मेडलों के साथ पहले नंबर पर रहा. तीसरे नंबर पर इंग्लैंड रहा जिसने कुल मेडल भारत से ज्यादा जीते. भारत के 101 पदकों की तुलना में इंग्लैंड ने 142 मेडल जीते. लेकिन उसने 37 गोल्ड जीते और भारत एक स्वर्ण पदक ज्यादा पाकर दूसरे नंबर पर रहा.

इन खेलों की शुरुआत काफी तूतू मैंमैं और आलोचनाओं के साथ हुई थी, लेकिन खेल समापन के बाद कॉमनवेल्थ खेल संघ के अध्यक्ष माइक फेनेल ने दिल्ली की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, "दिल्ली ने शानदार प्रदर्शन किया. शुरू में तो लोग इस बात को लेकर भी सुनिश्चित नहीं थे कि भारत जाएं या नहीं. जब मैं 23 सितंबर को दिल्ली आया तो मुझसे यह तक पूछा गया कि कॉमनवेल्थ खेलों को रद्द करने का एलान कब होगा."

उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ खेलों की छवि कुल मिलाकर अच्छी रही.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः महेश झा

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