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दुनिया

दिल्ली को स्वस्थ करने के लिए कार-फ्री-डे

दिल्ली को स्वस्थ करें, आओ अब बस करें. इस नारे के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लाल किले से साइकिल रैली को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया. लेकिन इससे दिल्ली को कितना फायदा होगा?

वीडियो देखें 01:42

दिल्ली ने मनाया कार-फ्री-डे

दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर नई दिल्ली ने कुछ घंटों के लिए अपने निवासियों को साफ हवा में सांस लेने का मौका दिया. कम से कम कोशिश तो यही थी. लाल किले से इंडिया गेट के बीच सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक कारों को चलने की अनुमति नहीं थी. इस रूट पर 20 शटल बसें चलाई गईं और सैकड़ों की संख्या में लोगों ने साइकिल की सवारी की.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी सफेद टीशर्ट पहने और सफेद टोपी लगाए साइकिल चलाते हुए नजर आए. इस मौके पर उन्होंने कहा, "हम सबको सड़कों से जाम हटाने और प्रदूषण को कम करने में योगदान देना होगा. लोग अपनी कारें छोड़ें और सार्वजनिक परिवहन तथा साइकिलों का इस्तेमाल करें."

हालांकि महज छह किलोमीटर लंबी सड़क को ही कार फ्री किया गया. लेकिन जानकार इसे सही दिशा में पहला कदम बता रहे हैं. रैली में हिस्सा लेने वाले पर्यावरण कार्यकर्ता सुनील कुमार ने कहा, "भले ही यह कुछ घंटों के लिए है लेकिन यह एक अच्छी पहल है. हमें लोगों को एहसास दिलाना होगा कि वायु प्रदूषण से हमारी सेहत पर कितना बुरा असर पड़ रहा है."

हालांकि कई लोगों ने इसे महज पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए कहा कि किसी एक सड़क को कुछ घंटों के लिए बंद कर देने से दिल्ली की समस्या का समाधान नहीं निकलेगा. दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा कि इस पहल के पीछे विचार लोगों की सोच बदलने का है, "लोगों को हम बस, मेट्रो और रिक्शा का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं ताकि दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके. अपनी बात उन्होंने एक वीडियो संदेश के जरिए भी लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की.

दिल्ली में प्रदूषण के कई स्रोत हैं. राजधानी से सटे गांवों में खेतों को आग लगाने से भी हवा खराब हो रही है. इसके अलावा दिल्ली और आसपास के इलाकों में कई फैक्ट्रियां और ईंटों की भट्टियां भी हैं. साथ ही मिट्टी के तेल, लकड़ी और गोबर के उपलों का आज भी खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होता है. और जहां तक गाड़ियों की बात है, तो दिल्ली रिकॉर्ड बनाती दिख रही है. शहर में 75 लाख से भी ज्यादा वाहन हैं.

करीब 1.2 अरब की आबादी वाले भारत में कारों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. आंकड़े बताते हैं कि 1991 में देश में दो करोड़ कारें थीं. 2011 में यह संख्या 14 करोड़ पार कर चुकी थी और 2030 तक इसके 40 करोड़ होने की संभावना है. ऐसे में वायु प्रदूषण का स्तर तो बढ़ेगा ही. इस कारण केवल दिल्ली में ही नहीं, बल्कि देश भर में कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियों में इजाफा देखा गया है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वायु प्रदूषण भारत में सालाना 6,27,000 लोगों की जान ले रहा है. ऐसे में कुछ महीनों में एक आध बार केवल पांच छह किलोमीटर को कार-फ्री कर देना काफी नहीं लगता.

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