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मनोरंजन

दादागिरी का शिकार जापानी स्कूल

जापानी स्कूलों में साथ में पढ़ने वाले बच्चे ही अपने साथियों पर दादागिरी करते हैं, उन्हें डराते धमकाते हैं. यह मुश्किल इतनी बढ़ गई है कि अदालत को मामले में बीच बचाव करना पड़ा है.

घटना उत्तरी टोक्यो के कानाजावा जिला अदालत की है. अदालत ने फैसला दिया कि 12 साल की एक लड़की को 69,051 यूरो यानी करीब 48 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. क्योंकि इस लड़की को साथ पढ़ने वाले दूसरे बच्चों ने इतना धमकाया कि वह तनाव से होने वाली मानसिक बीमारी पीटीएसडी का शिकार हो गई.

चूंकि लड़की वयस्क नहीं, इसलिए उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया. लेकिन कागा में उसके परिवार ने नौ अन्य बच्चों के माता पिता से करीब चार करोड़ येन का मुआवजा लिया. फैसला सुनाते हुए जज अकीरा ओनोसे ने कहा, तीन साथी छात्रों के धमकाने की वजह से पीटीएसडी की स्थिति पैदा हुई और शहर बच्चे की रक्षा के अपने कर्तव्य में ढीला पड़ गया.

बच्ची का नाम ले ले कर चिढ़ाने से जो शुरुआत हुई वह आखिर में ऐसे मोड़ पर पहुंच गई कि उस बच्ची को सीढ़ियों से धक्का दिया गया. जज ने कहा कि स्कूल को इस बारे में पता था लेकिन छात्रों के माता पिता से संपर्क करने में शिक्षकों ने काफी ढिलाई बरती. ओनोसे ने फैसला दिया कि दादागिरी ने बच्चे को भावनात्मक दर्द पहुंचाया और यह अवैध है.

जापान के स्कूलों में यह समस्या काफी समय से है लेकिन हाल के दिनों में इस तरह के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी के कारण लोगों का इस पर ध्यान गया. अधिकतर मामलों में स्कूली अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया जाता है.

बहुत गंभीर मामलों में जापानी युवा दादागिरी के कारण आत्महत्या करने पर भी मजबूर हो जाते हैं.

पिछले छह महीने में जापान में 75 हजार से ज्यादा इस तरह के मामले सामने आए हैं. जिसमें स्कूल में पढऩे वाले बच्चों ने किसी को धमकाया हो या दादागिरी की हो.

जापान के शिक्षा मंत्रालय ने हालात का जायजा लेने के लिए के एक आपात सर्वे करवाया है. और इसकी रिपोर्ट पहली अक्टूबर को जारी की गई. इस रिपोर्ट में सामने आया कि पिछले छह महीने में जापान के स्कूलों में 75 हजार ऐसे मामले हुए हैं. 2011 में यह आंकड़े 70 हजार 231 थे.

स्कूलों में बच्चों की दादागिरी या धमकाना कई पीढ़ियों से एक समस्या रही है लेकिन हाल के दिनों में साइबर बुलीइंग का तरीका सामने आया वह बहुत की तकलीफदेह है. इसमें इंटरनेट के जरिए बच्चे एक दूसरे पर दबाव बनाते हैं या एक दूसरे के बारे में इंटरनेट में बातें फैला देते हैं. मंत्रालय ने कहा कि करीब ढाई सौ मामले इतने गंभीर थे कि इससे बच्चों के दिमाग पर गहरा असर पड़ने का डर था.

2011 के अक्टूबर में एक 13 साल का बच्चा ओट्सू में 14 मंजिल ऊंचे मकान से कूद गया. मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बिठाने की अनुमति देने में अधिकारियों ने 10 महीने लगा दिए. लेकिन जब परिवार ने अपना मुंह खोला तो जापान में स्कूलों में होने वाली दादागिरी और बच्चों पर उसके गंभीर परिणामों के बारे में नई बहस छिड़ गई.

शुरुआती समय में पुलिस और स्कूल ने यह बात मानने से इनकार कर दिया था कि बच्चे की मौत में लंबे समय से दी जा धमकियों का कोई हाथ था. इससे स्थानीय शिक्षा अधिकारियों, पुलिस और शिक्षक एकदम फोकस में आए क्योंकि वह इन मामलों पर रोक नहीं लगा पा रहे थे.

लोगों में गुस्सा

अधिकारियों के जल्दी कार्रवाई नहीं करने पर स्थानीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पर गुस्साए 19 साल के एक युवा ने हथौड़े से हमला कर दिया. संदिग्ध युवक ने पुलिस को बताया कि वह केनजी सावामुरा को मारना चाहता था क्योंकि उन्होंने मामले का सच छिपाया.

पुलिस में की गई शिकायत में मृत बच्चे के पिता ने पुलिस को बताया को उनके बच्चे को जो अत्याचार झेलने पड़े उसमें सिगरेट से दागना, चोरी के लिए दबाव डालना शामिल था. इतना ही नहीं बच्चे की स्कूली किताबों को फाड़ दिया गया. उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया.

जिस बच्चे ने आत्महत्या की, वह अकेला मामला नहीं है. 2011 में जूनियर और सीनियर स्कूलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या 200 थी, जो इसके पहले के साल की तुलना में 44 ज्यादा रही. 2011 में जापान में आत्महत्या करने वाले सभी उम्र के कुल लोगों की संख्या 30 हजार 513 थी.

अगस्त में जापान की सरकार ने बच्चों को आत्महत्या से रोकने के लिए नई नीति तैयार की जिसमें शिक्षा अधिकारियों, स्कूल और परिवारों से उम्मीद की जा रही है कि वह धमकाने, मार पीट, दादागिरी के मामलों में सूचना साझी करें. और जब भी ऐसे मामलों का पता चले, तुरंत कार्रवाई की जाए.

एएम/एजेए (डीडब्ल्यू)

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