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दुनिया

दागी सांसद अध्यादेश वापस

भारत में दागी सांसदों और विधायकों को बचाने के लिए लाया जाने वाला अध्यादेश कैबिनेट ने वापस लेने का फैसला किया है. बुधवार शाम दिल्ली में कैबिनेट की बैठक में हुआ यह फैसला.

बुधवार शाम प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश को वापस लेने का फैसला किया गया. कैबिनेट की बैठक महज 20 मिनट चली और फैसला हो गया. कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, "केद्रीय कैबिनेट ने सर्वसम्मति से रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट के कुछ प्रावधानों के बारे में लाए जाने वाले अध्यादेश के साथ ही (संसद में लंबित) बिल को वापस लेने का फैसला किया है." इससे पहले पूरे दिन सत्ता के गलियारे में गहमागहमी बनी रही. सबसे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की. बताया जा रहा है कि इस बैठक में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से सख्त भाषा इस्तेमाल करने पर अफसोस जताया. इसके बाद सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हुई.

पिछले महीने की 24 तारीख को केंद्रीय कैबिनेट ने एक अध्यादेश लाने की मंजूरी दी थी जो सुप्रीम कोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को बेअसर करने के लिए तैयार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि किसी भी अदालत से दोषी करार दिए जाने और दो साल से ज्यादा की सजा मिलने के साथ ही सांसद और विधायक सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएंगे. सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर इस वक्त जिस पर होगा वो हैं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद जो चारा घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में हैं और सजा सुनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं.

अध्यादेश को लेकर राहुल गांधी के सार्वजनिक रूप से दिए बयान और विपक्षी दलों के साथ ही सहयोगियों की झिड़की सुनने का बाद सरकार ने इसे वापस लेने का मन बनाया. कैबिनेट की बैठक के पहले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सहयोगी दलों से बात कर अध्यादेश वापस लेने के इरादे के बारे में बता दिया था. जिन सहयोगी दलों के नेताओं से बात की गई उसमें एनसीपी के शरद पवार और राष्ट्रीय लोक दल के अजित सिंह प्रमुख हैं. इन दोनों नेताओं ने सरकार के फैसले के साथ सहमति जताई और इसका स्वागत किया. कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि पार्टी को सहयोगी दलों के इस मुद्दे पर साथ बने रहने की उम्मीद है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने खबर दी है कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर अटॉर्नी जनरल से भी बात कर सलाह ली थी. सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस अध्यादेश को "बकवास" कह "फाड़ कर फेंकने" की बात कही थी. यह तब की बात है जब प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक आमसभा में शामिल होने के लिये न्यू यॉर्क गए थे. राहुल गांधी का बयान आने के बाद विपक्षी दलों को भी अंगुली उठाने का मौका मिल गया और सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल हो गया.

एनआर/एमजे (पीटीआई, डीपीए)

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