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दुनिया

दवा कंपनियों के गले में खिचखिच करेगी सरकार

भारत में बड़ी संख्या में किशोर और बच्चे नशे के लिए कफ सिरप का इस्तेमाल कर रहे हैं. दवा की आड़ में फैलता नशे के यह कारोबार पूरे दक्षिण एशिया को अपनी चपेट में ले रहा है.

अंतरराष्ट्रीय नार्कोटिक्स कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक भारत से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं दूसरे देशों में भेजी जा रही हैं. खांसी और गले की तकलीफ में आराम देने वाले कफ सिरप तस्करों की खास पसंद हैं. कफ सिरप में कोडीन का इस्तेमाल होता है. कोडीन नशीला पदार्थ है. यह बलगम को दबाने में मदद करता है. लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा या लगातार इस्तेमाल से नशे की लत लग सकती है.

अंतरराष्ट्रीय नार्कोटिक्स कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक बांग्लादेश में कोडीन पर 1980 के दशक से प्रतिबंध है. लेकिन तस्कर भारत से बड़े पैमाने पर कोडीन आधारित कफ सिरप बांग्लादेश पहुंचा रहे हैं. बीते साल बांग्लादेश में कोडीन वाले कफ सिरप की 75 लाख बोतलें जब्त की गईं.

नार्कोटिक्स कंट्रोल बोर्ड भारत सरकार को अपनी चिंता से अवगत करा चुका है. भारत सरकार अब इस पर लगाम कसने की तैयारी कर रही है. वित्त मंत्रालय की एक अधिकारी के मुताबिक दवा कंपनियों से साल भर पहले ही कहा गया था कि वे कोडीन आधारित कफ सिरप बेचते समय खासी सावधानी बरतें. सरकार ने दिशानिर्देश भी जारी किए. इसके चलते दवा कंपनियों ने सिंगल बैच में कफ सिरप प्रोडक्शन कम कर दिया और बोतलों की संख्या भी घटा दी.

Ecstasy Droge Pillen

किशोरों में नशाखोरी बड़ी समस्या

लेकिन साल भर बाद दिशानिर्देशों की समीक्षा में सरकार को पता चला है कि बाजार में कफ सिरप की जोरदार मांग के चलते कुछ दवा कंपनियों ने लेबलिंग प्रक्रिया में छेड़छाड़ की. वित्त मंत्रालय में नार्कोटिक्स आवंटन से जुड़ी अधिकारी रश्मि वर्मा आने वाले दिनों में सख्त कदम उठाने का संकेत दे रही हैं, "हम उन पर दबाव डालेंगे." दवा कंपनियों के साथ वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की आने वाले दिनों में बैठक होगी.

वर्मा के मुताबिक कुछ राज्यों में दवाओं की मांग आश्चर्यजनक रूप से ज्यादा है. वित्त मंत्रालय ने दवा को कंपनियों से इन राज्यों में नए नियमों को ठीक से मानने का आदेश दिया है. भारतीय दवा कंपनियों को कोडीन सिर्फ सरकारी फैक्ट्रियों से मिलता है. सरकार पहले ही दवा कंपनियों को दिये जाने वाले कोडीन की मात्रा कम कर चुकी है.

भारत में कोडीन आधारित कफ सिरप बाजार 10.3 करोड़ डॉलर का है. फिलहाल इस बाजार पर अमेरिकी कंपनी फाइजर और एबट लेबोट्रीज का दबदबा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जब इन दोनों कंपनियों की भारतीय शाखा से संपर्क किया तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

दवा कंपनियों का कहना है कि वे सिरप के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं. लेकिन दवा उद्योग के अधिकारी महंगाई की शिकायत भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि नए कदमों से दवा के दाम काफी ऊंचे हो जाएंगे, जिससे इनके निर्माताओं को मुश्किल होगी.

भारत में मार्च 2015 से अब तक कोडीन आधारित कफ सिरप की 83,000 बोतलें जब्त की जा चुकी हैं. जुलाई में नार्कोटिक्स नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों की बैठक भी हुई. बैठक में कोडीन वाले कफ सिरप पर पूरी तरह पाबंदी लगाने पर भी चर्चा हुई. लेकिन इसका विरोध भी हुआ. वर्मा के मुताबिक, सरकार दवा पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहती है क्योंकि सही मेडिकल कारणों से इसकी मांग बनी रहती है.

ओएसजे/आईबी (रॉयटर्स)

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