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दुनिया

दलाई लामा, तिब्बत पर चीन ने दिखाई लाल आंखें

भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से चीन की ताकतवर राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की मुलाकात. सीपीपीसीसी के अधिकारियों भारत के सामने कड़ी नाराजगी जताते हुए तिब्बत और दलाई लामा का मुद्दा उठाया.

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चाइना पीपल्स पॉलिटिकल कन्सल्टटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) ने अधिकारियों ने भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात कर अपनी तल्खी जताई. चीनी राष्ट्रपति हू चिंथाओ से मुलाकात के अगले दिन हुई इस बातचीत में चीनी पक्ष ने कहा, कि दलाई लामा सिर्फ आध्यात्मिक नेता नहीं हैं. सीपीपीसीसी के 70 साल के अध्यक्ष जिआ ने कहा कि दलाई लामा राजनीतिक नेता ज़्यादा हैं.

सीपीपीसीसी चीन की चौथी सबसे बड़ी और ताकतवर पार्टी है. 2196 प्रतिनिधियों वाली इस पार्टी ने जोर दिया कि भारत ने तिब्बत को भी चीन का अखंड हिस्सा मान लेना चाहिए. इसके जवाब में भारतीय राष्ट्रपति ने कहा, कि भारत यही मानता है. पाटिल ने भरोसा देते हुए कहा कि केंद्र सरकार भारत में रह रहे तिब्बतियों को अपनी जमीन से चीन विरोधी गतिविधियां नहीं चलाने देगी. दलाई लामा के सवाल पर पाटिल ने भारत के रुख को दोहराया. उन्होंने कहा कि दलाई लामा भारत में रहने वाले एक आध्यात्मिक नेता हैं.

Deutschland Tibet Dalai Lama in Frankfurt

विवाद का केंद्र तिब्बत और दलाई लामा

चीन के आक्रोश को सामान्य बताते हुए भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, ''अक्सर भारत और चीन की बातचीत के दौरान सभी मुद्दे उठते हैं. एक एक जटिल रिश्ता है.'' भारतीय राष्ट्रपति के दौरे को सफल बताते हुए विदेश सचिव ने कहा कि, इससे ''एक दूसरे की चिंताओं के प्रति जागरुकता बढ़ी है.'' प्रतिभा पाटिल छह दिन के चीन दौरे पर हैं. वह चीन के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुकी हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: आभा मोंढे

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