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दुनिया

दलाई लामा की वेबसाइट में सेंध

तिब्बती गुरु दलाई लामा की चीनी भाषा वाली वेबसाइट हैक हो गई है और इसे विजिट करने वाले लोगों तक खतरनाक वाइरस पहुंच रहे हैं. अंदेशा है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए सुनियोजित तरीके से ऐसा किया गया.

कंप्यूटर सुरक्षा की प्रमुख कंपनी कैस्परस्पाई लैब के रिसर्चर कुर्ट बाउमगार्टनर ने इंटरनेट सर्फ करने वालों को सलाह दी है कि फिलहाल वे इस वेबसाइट से दूर रहें. उन्होंने अपने ब्लॉग पर इस साइबर हमले की सूचना दी है. आपके कंप्यूटरों की सुरक्षा को देखते हुए हम इस वेबसाइट का लिंक नहीं दे रहे हैं.

पहले भी इस वेबसाइट पर हमले की कोशिश की गई है और बाउमगार्टनर का कहना है कि हमलावर एशिया में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना चाहते हैं. जो तरीका अपनाया गया है उसे "वाटर होलिंग" कहते हैं, जिसमें हैकर पहले किसी वेबसाइट को कब्जे में लेते हैं. इसके बाद वहां विजिट करने वाले लोगों के कंप्यूटरों में खतरनाक वाइरस डाउनलोड होने लगते हैं.

तिब्बत के न्यूयॉर्क वाले दफ्तर में किसी ने इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की. 78 साल के दलाई लामा का अमेरिका में प्रतिनिधित्व इसी दफ्तर से होता है. दलाई लामा ने चीन के खिलाफ नाकाम विरोध की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें 1959 में तिब्बत से भागना पड़ा और अब वह भारत के धर्मशाला में रहते हैं.

बीजिंग का मानना है कि दलाई लामा एक हिंसक अलगाववादी हैं और चीनी मीडिया में आए दिन उनके खिलाफ रिपोर्टें छपती रहती हैं. दलाई लामा का कहना है कि वह सिर्फ अपने तिब्बत प्रांत के लिए ज्यादा स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं.

बाउमगार्टनर का कहना है कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर 2011 के बाद से लगातार हमले हो रहे हैं लेकिन पहले इन्हें चुपचाप दुरुस्त कर लिया जाता रहा है, "वे लोग (हैकर) लगातार इस वेबसाइट में सेंध लगाने की कोशिश करते आए हैं." उनका कहना है कि अंग्रेजी और तिब्बती वेबसाइट सुरक्षित है और उस पर जाया जा सकता है.

इसकी बारीकी बताते हुए उन्होंने कहा कि हैकरों ने ओरैकेल कॉर्प के जावा सॉफ्टवेयर में सेंध लगाई, जिससे दूसरे विंडोज और एप्पल मैक ऑपरेटिंग सिस्टमों तक पहुंच बनाई जा सकती है. हालांकि ओरैकेल के प्रवक्ता ने इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.

इसके बाद कोई "पीछे के रास्ते" से वेबसाइट में पहुंच सकता है और मनचाही फाइलों को डाउनलोड कर सकता है. वाटर होलिंग के जानकार ईएमसी कॉर्प के विल गराडिगो का कहना है कि इस खास तरीके को "एडवांस परसिस्टेंट थ्रेट" (एपीटी) कहते हैं और कई बार ईमेल के जरिए भी ऐसा हमला किया जा सकता है, "यह ऐसी साइट (दलाई लामा) है, जहां खास तरह के लोग ही जाते हैं." उनका इशारा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की तरफ है.

एजेए/एमजे (रॉयटर्स)

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