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विज्ञान

दर्द में दवा से ज्यादा ध्यान से राहत

भारत समेत एशियाई देशों में ध्यान को शांति और एकाग्रता के लिए अहम माना जाता रहा है. अब रिसर्चरों ने दावा किया है कि इससे पीठ के पुराने दर्द से लड़ने में भी मदद मिलती है.

योग और ध्यान संबंधी थेरैपियों की अहमियत पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिया जा रहा है. तनाव आधुनिक जीवन का अनचाहा हिस्सा बन गया है. इससे कई शारीरिक समस्याएं भी समाज में बढ़ रही है. इन्ही में पीठ और शरीर के अन्य अंगों में दर्द होना भी शामिल है. रिसर्चरों का मानना है कि पीठ के दर्द की स्थिति में ध्यान करने से राहत मिल सकती है.

26 हफ्ते की रिसर्च के बाद रिसर्चरों ने निष्कर्ष निकाला कि तनाव संबंधी दर्द में ध्यान और कोग्निटिव बिहेवियर थेरैपी चिकित्सकीय रूप से अहम साबित होती है. यह आम तौर पर अपनाए जाने वाले उपायों की तुलना में ज्यादा असरदार है. अध्ययन में योग और ध्यान के बाद मरीजों में 61 फीसदी बेहतरी पाई गई, जबकि पारंपरिक दवाओं से 44 फीसदी और कोग्निटिव बिहेवियर थेरैपी से 58 फीसदी फायदा होता पाया गया.

अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन की पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन में 342 वयस्कों को शामिल किया गया जिनकी उम्र 20 से 70 के बीच थी. उन्हें औसतन सात साल से पीठ के दर्द की शिकायत थी. इनमें से एक तिहाई को बिना किसी निर्धारित पैमाने के चुना गया और उन पर योग आजमाया गया. अन्य एक तिहाई पर कोग्निटिव बिहेवियर थेरैपी का इस्तेमाल हुआ. इसके अंतर्गत मरीजों को बुरी सोच और नकारात्मकता से दूरी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. साथ ही उनकी अन्य खराब आदतों से उन्हें दूर रखा जाता है. बाकी बचे एक तिहाई का इलाज दवाओं से किया गया.

रिसर्चरों का मानना है कि उन्हें इस रिपोर्ट से अंदाजा हुआ कि पीठ के दर्द के इलाज में योग और ध्यान सबसे ज्यादा असरदार साबित हो सकता है. हालांकि किस मरीज पर कौन सा तरीका ज्यादा कारगर होगा है यह बहुत हद तक मरीज की जीवनशैली पर भी निर्भर करता है. रिसर्चर इन नतीजों के आधार पर योग और ध्यान के चिकित्सा के क्षेत्र में इस्तेमाल पर और सटीक जवाब तलाश रहे हैं.

एसएफ/एमजे (एएफपी)

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