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मंथन

दरारों में चढ़ने वाले

अगर किसी की अंगुली कार के दरवाजे में फंस जाए तो.. टॉम रैंडेल और पीट विटेकर दरारों की चढ़ाई के बारे में कुछ ऐसा ही बताते हैं.

इस एक्स्ट्रीम खेल के ये ब्रिटिश दीवाने दुनिया के बेहतरीन क्लाइंबर में गिने जाते हैं. खड़े पहाड़ों की दरारों में हाथ पैरों को घुसा कर ऊपर चढ़ना इनकी खासियत है. इस सीधी चट्टान में पकड़ने के लिए सिर्फ छोटी सी दरारें हैं, जो दिखाई भी नहीं देतीं. इसी के सहारे ये चढ़ते हैं. टॉम रैंडेल कहते हैं, "मुझे वो अच्छा लगता है जो दूसरे लोगों से अलग है. इसलिए अगर लोग कहते हैं कि ये बुरा आयडिया है, तो मैं कहता हूं, गुड आयडिया!"

कैसे करते हैं

चढ़ाई शुरू करने से पहले वे चोटों से बचने के लिए हाथ पर बैंडेज बांध लेते हैं. शेफील्ड के पास की चट्टानें तो जैसे उनका घर हैं. यहां वो चढ़ाई की तकनीक पर मास्टरी करते हैं. पीट व्हिटेके बताते हैं, "लोगों को ये काफी मुश्किल लगता है. जब वो पहली बार करते हैं तो उनके पास कोई तकनीक नहीं होती. अक्सर हाथ, कोहनी और घुटने छिल जाते हैं. फिर उन्हें लगता है कि ये भयानक है. लेकिन जब आप थोड़ा सा कुछ करते हो तो आपको तकनीक समझ में आ जाती है और यह सामान्य चढा़ई जैसा लगता है."

चढ़ते वक्त खिलाड़ी मु्ख्य रूप से चट्टानों की दरारों पर लटककर ऊपर जाते हैं. इंग्लैंड की चट्टानों को तो वो पहचान ही चुके हैं. अब विदेशों की ओर उन्होंने रुख किया है. फिलहाल वो अमेरिका के यूटा के लिए दीवाने हुए हैं. बताया जाता है कि यहां का सेंचुरी क्रैक दुनिया की सबसे मुश्किल चढ़ाइयों में है. यहां तीन साल पहले ये दोनों ब्रिटिश खिलाड़ी चढ़े. वाइड ब्वाइज नाम की फिल्म में ये देखा जा सकता है. इस दरार की चौड़ाई को ऑफविड्थ कहा जाता है और इसे काफी मुश्किल माना जाता है. हाथ के लिए ये बहुत चौड़ी है और शरीर के लिए बहुत संकरी. टॉम रैंडल के शब्दों में, "ये चौड़ाई ऑफ साइज है, बिलकुल खराब क्योंकि जब आप शरीर से इसमें घुसने की कोशिश करते हैं तो नहीं घुस पाते. आपको कई तरह की तकनीक अपनानी पड़ती है, जो आप शुरुआती क्लाइम्बिंग के दौरान नहीं सीख सकते. इसलिए ये मुश्किल है और अगर चढ़ भी जाएं तो काफी दर्दनाक है."

घर पर तैयारी

इस चुनौती के लिए दोनों दोस्तों ने घर पर तैयारी की. घर ही में उन्होंने लकड़ी से सेंचुरी क्रैक तैयार किया, दो साल तक वो इसकी तैयारी करते रहे. हर ट्रेनिंग में करीब डेढ़ सौ मीटर की चढ़ाई. पीट व्हिटेके ने बताया, "कहीं भी और किसी क्लाइम्बिंग वॉल पर ये सुविधा नहीं है. और यह अहम था कि हमें बिलकुल वैसा ही कुछ मिलता. यहां पहले कभी चढ़ाई नहीं हुई और हमें एक खास स्टाइल की जरूरत थी, इसलिए हमने ये ढांचा तैयार किया." अब वो कई रूटों और चट्टानों के लिए भी यहीं प्रैक्टिस करते हैं.

कड़े अनुशासन से काम करना जरूरी है. क्योंकि दरारों में चढ़ने के लिए सिर्फ अंगुली की ताकत काम आती है क्योंकि वहां फंसाने के लिए इससे ज्यादा जगह होती भी नहीं. अपने घर के बागीचे में ही उन्होंने

उन्होंने ब्रिटिश कोलंबिया के कोबरा क्रैक पर चढ़ने की प्रैक्टिस की. 30 मीटर लंबी दरार की चढ़ाई करने से पहले उन्हें काफी प्रैक्टिस करनी पड़ी. टॉम रैंडल के बताया, "हम बिलकुल जी जान देकर, टूटकर ट्रेनिंग करते हैं. फिर हम बाहर जाते हैं तो सबकुछ आसान होता है क्योंकि ट्रेनिंग इतना सख्त था, बाहर सबकुछ मजेदार लगता है और आराम से हो जाता है. फिर कामयाब होना आसान होता है."

इन दोनों का लक्ष्य अब अमेरिका का योसेमीटी नेशनल पार्क की एल कापिटान चट्टान है. अब वो एक के बाद एक कई बार इस एक हजार मीटर ऊंची दीवार को चढ़ना चाहते हैं और कई तकनीकों को इस दौरान मिक्स करना चाहते हैं. शायद इस बार भी रिकॉर्ड बन जाए.

रिपोर्टः आंत्ये बिंडर/ईशा भाटिया
संपादनः आभा मोंढे

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