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मनोरंजन

दबाव में स्पेन की राजशाही

भारत को भले ही यूरोप के कई देशों में राजा महाराजाओं का देश माना जाता रहा हो. लेकिन वहां खत्म हो चुकी वह राजशाही यूरोप के कई देशों में अभी भी जारी है. फिलहाल स्पेन की राजशाही भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही है.

पत्रकारों के बीच गप्पें लगाते स्पेन के राजा खुआन कार्लोस, उनके साथ जोक सुनते, कॉमेडी शो का चश्मा पहन कर देखते... ये दृश्य 1970 के दशक में आम था जब वह दुनिया के सबसे पसंदीदा राजाओं में एक हुआ करते थे. मीडिया उनके साथ पूरे आदर से पेश आता और पद से हटने के बारे में तो कोई सोचता ही नहीं था.

लेकिन अब आधे से ज्यादा स्पेनवासी सोचते हैं कि उन्हें गद्दी अपने बेटे प्रिंस फिलिप को सौंप देनी चाहिए. वहीं एक तिहाई से ज्यादा लोग, जिनमें अधिकतर युवा हैं, उनका मत है कि अब देश को पूरी तरह लोकतांत्रिक हो जाना चाहिए.

75 साल के राजा इस बात का उदाहरण हैं कि घोटाले कैसे किसी को आसमान से जमीन पर गिरा देते हैं. 1975 में तानाशाह फ्रांसिस्को फ्रांको के मरने के बाद खुआन कार्लोस ने देश में लोकतंत्र लाने के लिए काफी काम किया और उस समय के लोग इसके लिए राजा का काफी सम्मान करते हैं. 40 साल की तानाशाही के बाद 1981 में सैन्य विद्रोह को भी सफलतापूर्वक रोक दिया गया था.

अब स्पेन के आर्थिक संकट के दौर में लोगों में राजा की शाही जीवनशैली और अफ्रीका में शिकार करने जैसे मामलों पर गुस्सा है. इसके अलावा उनकी बेटी और दामाद पर स्विस बैंक में गोपनीय खाते रखने सहित कुछ अन्य आरोप हैं.

Proteste gegen König Juan Carlos Tierrechtsaktivisten

व्यापक विरोध


सोशल मीडिया और चैट्स साइटों पर चल रही बहस से पता चलता है कि सामंती परिवार की कोरीना सू जाइन विटगेनश्टाइन के साथ राजा का नाम जुड़ने पर लोगों की सहानुभूति महारानी सोफिया के साथ बढ़ गई. उनकी जीवनी के लेखक कहते हैं कि वह एक ऐसे व्यक्ति की ब्याहता हैं जो सभी औरतों को पसंद करता है, सिवाय उसके जिसे उसने अपनी पत्नी चुना.

तिरस्कार

सामान्य तौर पर शाही परिवार इस तरह की खबरों पर अपना मुंह बंद ही रखता है लेकिन इस समय सामान्य स्पेनी नागरिक कर्ज, महंगाई, राजनीति में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं. ऐसे में शाही परिवार के घोटालों से लोगों में गुस्सा उबल रहा है. शाही अखबार एबीसी के संपादक बिएइटो रुबिडो कहते हैं, "जनता का मत रोका नहीं जा सकता. लोग अभी थोड़े हिचक रहे हैं और स्पेन की घटनाओं से चकित हैं." लेकिन वह भी अन्य शाही मामलों के विशेषज्ञों की तरह मानते हैं कि इससे राजशाही के भविष्य पर कोई खतरा नहीं है.

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के राजनीतिशास्त्री जोनैथन हॉपकिन्स कहते हैं, "लोग बहुत निराश हैं और इसके लिए किसी पर आरोप लगाना चाहते हैं. यह ऐसी स्थिति है कि कुछ भी हो सकता है."

वहीं शाही परिवार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शाही परिवार को अपनी घटती लोकप्रियता की चिंता है और वह इस स्थिति में और अनिश्चितता पैदा करने से बचना चाहती है. पैलेस सोशल मीडिया के जरिए लोगों की नब्ज देख रहा है.

हालांकि राजशाही खत्म करने के बारे में कोई भी नहीं सोच रहा. अगर राजा के पद छोड़ने की बात हो भी रही हो तो कोई इसे स्वीकार नहीं कर रहा. लेकिन जितनी देर इसे लटकाया जाएगा प्रिंस फिलिप की परेशानियां बढ़ेंगी. जानकारों का मानना है कि खुआन कार्लोस बदनामी के दौरान अपना पद नहीं छोड़ेंगे.

हालांकि उनके सामने एक उदाहरण है. नीदरलैंड्स की रानी बेआट्रिक्स ने घोषणा की है कि वह अपने बेटे के लिए पद से हट जाएंगी. स्पेन में राजकुमार फिलिप को काफी पसंद किया जाता है. लेकिन राजशाही के दिन फिलहाल खराब चल रहे हैं. 1997 के सर्वेक्षणों में राजशाही को 10 में से 6.67 अंक मिले थे लेकिन 2011 में उसे सिर्फ 4.97 अंक ही हासिल हुए.

Spanien / König Juan Carlos mit Königin Sofia

मुश्किल में राजा

प्रिंस फिलिप काफी दोस्ताना स्वभाव के और राजनीतिक मामलों को अच्छे से समझने वालों में शामिल हैं. उनकी पत्नी लेटिसिया ओरित्ज पत्रकार रह चुकी हैं और लोगों में पसंद की जाती हैं. बताया जाता है कि स्कैंडलों के कारण फिलिप अपने पिता और जीजा से काफी नाराज हैं. लेकिन ऐसा लग रहा है कि राजा इस पर कुछ नहीं करेंगे और विवाद अपने आप शांत होने देंगे.

क्रिस्टीना घोटाले में अदालत के आरोप के कई दिन बाद शाही परिवार ने घोषणा की कि वह नया ट्रांसपरेंसी कानून लागू करेगी ताकि शाही, सरकारी खर्चे के बारे में सबको पता चले. लेकिन आम राय यह है कि बहुत देरी के साथ बहुत कम उपाय किए जा रहे हैं.

यूरोप में राजशाही की विरासत काफी फैली हुई है. लोगों में अपने राजा रानियों के लिए प्यार भी है. ब्रिटेन और स्पेन के अलावा डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, बेल्जियम और लक्जेम्बर्ग में राजशाही की परंपरा जारी है.

रिपोर्टः आभा मोंढे (रॉयटर्स, एपी)

संपादनः महेश झा

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