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दुनिया

दक्षिण सूडान में फंसे भारतीयों के 'संकट मोचन'

भारतीय वायु सेना के दो C17 विमान दक्षिण सूडान में फंसे भारतीयों को वहां से बाहर निकालने के लिए राजधानी जूबा पहुंचे हैं. अमेरिका, जर्मनी समेत कई देश भी अपने नागरिकों को निकाल चुके हैं.

भारत सरकार दक्षिण सूडान में फंसे अपने नागरिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने और वापस भारत लाने के लिए खास अभियान चला रही है. गुरुवार को 'ऑपरेशन संकट मोचन' के नाम से शुरु हुए इस अभियान का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह कर रहे हैं.

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखे कई ट्वीट्स में इस ऑपरेशन के बारे में बताया. उन्होंने लिखा कि वीके सिंह के साथ विदेश मंत्रालय के सचिव अमर सिन्हा, संयुक्त सचिव सतबीर सिंह और निदेशक अंजनी कुमार होंगे. दक्षिण सूडान में भारत के राजदूत श्रीकुमार मेनन और उनकी टीम वहां फंसे भारतीयों को देश भेजे जाने की व्यवस्था कर रही है.

दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र दक्षिण सूडान 9 जुलाई 2016 को अपना पांचवा स्वाधीनता दिवस मना रहा था, जब से ये हिंसा शुरु हुई. राष्ट्रपति सल्वा कीर ने इसी सोमवार एकपक्षीय संघर्ष विराम घोषित किया था, जिसके बाद भी उनकी सरकारी सेना के जवान और पूर्व विद्रोही नेता और उपराष्ट्रपति रीक माछेर के समर्थक लड़ते रहे.

Südsudan Menschen fliehen aus Juba

जूबा से विस्थापित हुए लोग

मध्यपूर्व अफ्रीका में स्थित दक्षिण सूडान दुनिया का 193वां देश है. 2011 में सूडान दो हिस्सों में बंट गया था. दक्षिणी हिस्सा रिपब्लिक ऑफ साउथ सूडान बना और उत्तरी हिस्सा सूडान. इसके पूर्व में इथियोपिया, दक्षिण पूर्व में केन्या और दक्षिण में युगांडा है. दक्षिण पश्चिम में इसकी सीमा कांगो से और पश्चिम में सेंट्रल अफ्रीकी गणतंत्र से लगी हुई है.

C17 विमान भारतीय वायु सेना के ट्रांसपोर्ट विमान हैं. दक्षिण सूडान में करीब 300 भारतीय फंसे हुए हैं. जनरल सिंह की अगुवाई में पिछले साल संकटग्रस्त यमन से करीब 4,000 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था.

दक्षिण सूडान की स्थिति पर भारत की नजर बनी हुई है और इसके लिए भारत ने एक टास्क फोर्स भी गठित की हुई है. राजधानी जूबा के कई हिस्सों में पूर्व विद्रोहियों और सरकारी सैनिक आपस में लड़ रहे हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय की सूचना के अनुसार दक्षिण सूडान में करीब 600 भारतीय रहते हैं, जिनमें से 450 के आसपास राजधानी जूबा में और बाकी बाहर रहते हें. जूबा से बाहर निकाले जाने के लिए अभी तक 300 लोगों के ही भारतीय दूतावास के साथ रजिस्टर कराने की सूचना है.

एक दिन पहले बुधवार को ही जर्मनी ने वहां से अपने नागरिकों को बाहर निकाल लिया था, फिर भी 100 के करीब जर्मन नागरिक और सैनिक पर्यवेक्षक वहां मौजूद हैं. अमेरिका ने पहले ही दक्षिण सूडान में अपने दूतावास की सुरक्षा के लिए 47 सैन्य टुकड़ियां भेज दी हैं. व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया है, "ये तैनात की गई सेना दक्षिण सूडान में तब तक रहेंगी जब तक वहां सुरक्षा की स्थिति इतनी नहीं सुधरती, कि सेना की जरूरत ना रहे."

जूबा में जारी हिंसा के कारण अब तक करीब 42,000 लोगों के विस्थापित होने का अनुमान है. अगस्त 2015 को कीर और माछेर ने आपस में बातचीत कर एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और इसी अप्रैल में राष्ट्रीय एरका सरकार बनाई थी.

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