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दुनिया

थाईलैंड में राजनीतिक विरोध जारी

सरकार के खिलाफ केंद्रीय बैंकॉक में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रधानमंत्री को बंधक बनाने और सभी सरकारी कार्यालयों को बंद करवाने की धमकी दी है. प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावट ने फिर साफ किया है कि वह पद नहीं छोड़ेंगी.

बैंकाक में विपक्ष का शट डाउन मंगलवार को भी जारी रहा और हजारों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों तक मार्च किया. इन प्रदर्शनों का मकसद चिनावट सरकार को इस्तीफा देने पर मजबूर करना और फरवरी में होने वाले चुनावों को रोकना है. पिछले दो महीने से देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और रैलियों में अब तक आठ लोगों की जानें गई हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को मंत्रालयों और सरकारी दफ्तरों में जाने से रोक दिया ताकि प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावट पर दबाव बढ़ाया जा सके.

विपक्ष के नेता सुथेप थागसुबान ने रैली के दौरान मंच से आह्वान किया कि अगर प्रधानमंत्री पद नहीं छोड़ती हैं तो उन्हें कब्जे में ले लिया जाएगा और एक एक करके उनके कैबिनेट मंत्रियों को भी बंधक बना लिया जाएगा. सुथेप को गिरफ्तार करने के लिए पहले ही वॉरंट निकला हुआ है. उन पर आरोप है कि नवंबर में सरकारी मंत्रालयों को बंद करवाने में उनकी बड़ी भूमिका थी. इसके अलावा सुथेप पर हत्या का आरोप भी है जब सत्ता में रहते हुए उन्होंने एक मिलिटरी आपरेशन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था. 2010 में हुई उस घटना में दर्जनों लोगों की जान चली गयी थी.

वहीं चिनावट के समर्थकों का कहना है कि इस तरह की रैलियां देश के कमजोर लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है और सभी विवादों को 2 फरवरी को होने वाले चुनावों से सुलझाया जाना चाहिए. विरोधी प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि चुनाव कराने से पहले एक 'पीपुल्स काउंसिल' बनाई जाए जो चुनाव सुधारों पर काम करे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनाव में सुधारों से प्रधानमंत्री यिंगलक और उनके भाई थकसिन चिनावट के अरबपति परिवार की पैसों के बल पर चलाई जा रही राजनीति को रोका जा सकेगा.

थाइलैंड में यह राजनीतिक संकट पिछले सात सालों से चल रहा है जब सेना ने तख्तापलट कर थकसिन चिनावट को प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया था और उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तारी के डर से उन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा. थकसिन के उत्तरी थाइलैंड में काफी समर्थक हैं जबकि दक्षिणी थाइलैंड, देश के मध्यमवर्ग और राजा भूमिबोल के शाही परिवार के समर्थक उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं.

मंगलवार से प्रदर्शनकारी 20 लाख की आबादी वाली राजधानी बैंकॉक को पूरी तरह बंद करवाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बावजूद इस शहर के एक बड़े हिस्से में जनजीवन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. कई हिस्सों में स्कूल और दुकानें खोली जा रही हैं और लोग काम पर जा रहे हैं. समाचार एजेंसी एएफपी ने बताया कि सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की संख्या में कमी देखी गई और उनमें से भी कई लोग अपने काम पर वापस लौट गए हैं.

लेकिन फरवरी में चुनाव कराए जाने के लिए प्रदर्शनकारी और प्रमुख विपक्षी दल, डेमोक्रेट पार्टी अभी भी तैयार नहीं हैं. विपक्ष चुनाव का बहिष्कार करने की बात कह रहा है जबकि प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावट इसे सही कदम मानती हैं. यिंगलक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मैं अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की या पद पर बने रहने की कोशिश नहीं कर रही हूं. मैं लोकतंत्र को बचाने की कोशिश कर रही हूं."

यिंगलक ने बुधवार को अपने विरोधियों समेत बहुत से समूहों से मिलने की पेशकश की ताकि चुनाव आयोग के फरवरी चुनावों को स्थगित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सके. लेकिन प्रदर्शनकारियों के नेता सुथेप थागसुबान, प्रमुख विपक्षी दल डेमोक्रेट पार्टी और यहां तक कि खुद चुनाव आयोग ने भी इस बैठक में हिस्सा लेने से मना कर दिया.

आरआर/एमजे(एएफपी/एपी)

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