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जर्मन चुनाव

...तो ना होता मुंबई आतंकी हमला

लश्कर के आतंकवादी डेविड हेडली की गतिविधियों के बारे में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इतनी सारी जानकारी मिल चुकी थी कि अगर सही तरीके से कार्रवाई की गई होती तो मुंबई आतंकवादी हमलों को रोका जा सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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डेविड हेडली पर मुकदमा जारी

शनिवार को अमेरिकी मीडिया में आई एक खबर के मुताबिक डेविड हेडली की दो पत्नियों के अलावा भी कई सूत्रों के जरिए डेविड कोलमैन हेडली की भारत विरोधी गतिविधियों की सूचना अमेरिकी एजेंसियों को मिली थी. खबर के मुताबिक कुल मिलाकर पांच अलग अलग सूत्रों ने हेडली के बारे में जानकारी दी थी.

राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों की एक समीक्षा के दौरान पता चला है कि 2001 से ही डेविड हेडली के बारे में सूचनाएं मिल रही थीं और इन पर कार्रवाई की गई होती तो उसकी योजनाओं को पूरा होने से रोका जा सकता था. लेकिन अमेरिकी खुफिया तंत्र इन सूचनाओं पर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहा जिसका नतीजा यह निकला कि डेविड हेडली ने मुंबई में हुए खतरनाक और विनाशकारी हमले की न सिर्फ योजना बनाई बल्कि पाकिस्तान में बैठे लश्कर के आतंकवादियों की मदद से इस पूरी योजना को अमली जामा भी पहना डाला.

अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट में इस समीक्षा के आधार पर एक रिपोर्ट छापी गई है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सात साल तक हेडली के बारे में सूचनाएं मिलती रहीं लेकिन इस डबल एजेंट पर ना तो पहरा लगाया गया और न ही उससे पूछताछ की गई. असल में मुंबई हमलों से सिर्फ सात महीने पहले हेडली की एक पूर्व पत्नी ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा था कि उन्हें शक है कि उनका पति 2007 में भारत में हुए आतंकवादी हमलों से जुड़ा है. 2007 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम धमाके हुए थे.

यह रिपोर्ट ऐसे समय में बाहर आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत के मुंबई की यात्रा पर पहुंचे हैं और मुंबई के उसी होटल में रुके हैं जहां डेविड हेडली की योजना के तहत आतंकियों ने हमला किया था.

द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि खुफिया एजेंसियां लश्कर ए तैयबा को ज्यादा तवज्जो नहीं देतीं इसलिए भी वे लोग मुंबई आतंकी हमले के खतरे को पहचानने में नाकाम रहे.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एमजी

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