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दुनिया

तो कुछ ऐसा दिखता था दुनिया का पहला फूल

14 से 25 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर पहली बार एक फूल खिला. कुछ कुछ कमल जैसा दिखने वाले उस फूल से आज दुनिया भर में मौजूद सारे फूल पैदा हुए.

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यह तस्वीर प्रतीकात्मक है.

यूरोपीय वनस्पतिशास्त्रियों ने सभी जीवित फूलों के लक्षणों और विशेषताओं के आकंड़ों की मदद से यह पहचान कर ली है कि दुनिया का पहला फूल किस तरह का दिखता था. वैज्ञानिकों को मुताबिक वॉटर लिली जैसा दिखने वाला वह फूल पहली बार 14 से 25 करोड़ साल पहले खिला. वैज्ञानिक जानते हैं कि धरती पर आज मौजूद करोड़ों किस्म के फूल उसी से निकले. लेकिन क्रमिक विकास का यह क्रम चला कैसे, यह जानना अब भी एक पहेली है.

इस खोज में फ्रांस की यूनिवर्सिटी पेरिस-सूड के लेखक हार्वे सॉकेट भी शामिल थे. डॉक्टर सॉकेट ने कहा कि यह फूल अतीत काल का है और उन्हें वह आकर्षक लगा. इस बात से वनस्पति विशेषज्ञों में खासा उत्साह है और खासकर ऑस्ट्रेलिया में जहां डॉक्टर सॉकेट अगले महीने पहुंच कर सिडनी के बॉटैनिक गार्डन में काम करने वाले हैं.

शहर के कुछ बागानों के प्रबंधक मार्को ड्यूरतो ने कहा कि अंतिम खोज रोमांचक है. यह फूल उन सभी 3,50,000 फूलों से पहले आया जिन्हें हम आज जानते हैं. उन्होंने कहा, "यह बहुत रोमांचक हैं क्योंकि बहुत सारे लोगों ने बहुत सारा काम किया है. खासकर यूरोप में लेकिन उत्तरी अमेरिकी ने भी यह जानने की कोशिश की कि पहला फूल कैसा दिखता होगा."

मनुष्य और फूल: यह प्रेम और विकास है

फूलों का आकर्षण आश्चर्यजनक नहीं है, यह पृथ्वी पर अधिक जैविक जीवन का प्रचार करने के लिए जिम्मेदार है.

लोगों में सभी फूलों के प्रति मोह है. यहां तक कि ऐसे फूल जिनकी गंध बहुत अजीब और भयानक है वे भी बहुत लोकप्रिय हैं. बहुत ही दुर्लभ "कॉर्प्स फ्लावर" साल में एक बार खिलता है. यह एक बड़ा फूल है जिसमें से कच्चे मांस की तरह गंध आती है. लेकिन फिर भी इस फूल को देखने के लिए बड़ी मात्रा में लोग एडिलेड के बॉटनिक गार्डन पहुंचते हैं. इस साल के शुरुआत में यहां पहुंचने वाले लोगों को इस फूल की बदबू की वजह से सेंट लगाया गया था.

अब लोग एडिनबर्ग के रॉयल बॉटनिक गार्डन में इकट्ठा हो रहे हैं ताकि एक और "कॉर्प्स फ्लावर" को खिलता हुआ देख सकें. एक विशेषज्ञ सैडी बार्बर कहती हैं कि यह बिल्कुल बच्चे को जन्म देने की तरह है आपको ठीक ठीक नहीं पता होता कि यह कब होगा.

पहले फूल की जिज्ञासाएं

खैर. पहले फूल को लेकर अब भी बहुत सारे सवाल बने हुए हैं कि उसका रंग कैसा रहा होगा, इसके पराग कण कैसे रहे होंगे या यह एक लिंगीय रहा होगा या उभयलिंगीय. 

मार्को ड्यूरतो कहते हैं कि पहले फूल का उद्भव विज्ञान का एक बड़ा रहस्य था और शायद हम फूलों के उद्भव से ज्यादा चांद के उद्भव के बारे में जानते हैं. फूल वास्तव में हमारी दुनिया में, हमारे विकास के लिए महत्वपूर्ण थे.

-शोभा शमी

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