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खेल

तेंदुलकर वर्ष रहा 2010

क्रिकेट की दुनिया में 2010 का आरंभ और अंत सचिन तेंदुलकर के नाम से हुआ. नवंबर 2009 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 175 रन की पारी खेलने के बाद तेंदुलकर ने विपक्षी टीमों पर गजब का आंतक मचाना जारी रखा. साल भर उनका बल्ला खूब गरजा.

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24 फरवरी 2010 को उन्होंने यादगार बना दिया. ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनकी नाबाद 200 रन की पारी सबको मुग्ध कर गई. चारों ओर से बधाइयों का तांता लग गया.

कुछ आलोचक कहने लगे कि बस सचिन ने एक पारी खेल दी है अब उनका बल्ला खामोश ही रहेगा. लेकिन साल भर मास्टर ब्लास्टर ने ऐसे स्ट्रोक लगाए कि आलोचक अपनी जगह से हिल भी न सके. कमेंट्रटर कहते रह गए कि, अविश्वसनीय तेंदुलकर.

Sachin Tendulkar

लेकिन साल के बीच का समय सचिन, उनके प्रशंसकों और भारतीय राजनीति में सुधार की वकालत करने वालों के लिए कड़वा अनुभव रहा. सभी पार्टियों के नेता जब राजनीति के नाम पर मुंबई और मराठी चालें खेल रहे थे तो सचिन ने कहा, मुंबई सबकी है. इसके बाद एक राज्य से बाहर एक सीट न जीत पाने वाले कई नेता सचिन पर मीडिया के जरिए चढ़ बैठे. हालांकि एकाध महीने बीतते ही यही नेता सचिन को भारत रत्न देने की मांग करने लगे. इस घटना से भी पता चलता है कि 2010 में सचिन ने सिर्फ मैदान पर नहीं बल्कि आम लोगों और इंसानियत के लिए भी बल्लेबाजी की.

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