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खेल

तेंदुलकर के लिए जीतना होगा विश्व कप

सचिन तेंदुलकर लगभग दो दशकों से भारत के लिए खेल रहे हैं और 2011 का वर्ल्ड कप शायद उनके लिए आखिरी हो सकता है. किसी के लिए नहीं, तो टीम को सचिन के लिए खिताब हासिल करने की कोशिश करनी होगी.

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सचिन की खातिर

तेंदुलकर इस साल 2 अप्रैल को 38 साल के हो जाएंगे. वर्ल्ड कप के लिए घोषित भारतीय टीम में सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर भी सचिन के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहते हैं. वह कहते हैं, "मैं सच में चाहता हूं कि यह सचिन का अंतिम विश्व कप न हो और वह एक और विश्व कप में खेलें. भारतीय टीम के सारे सदस्य उनके लिए यह खिताब जीतना चाहेंगे."

19 फरवरी को भारत की टीम बांग्लादेश के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेगी. 2007 के वर्ल्ड कप में शुरुआती मैच में बांग्लादेश ने भारत को हराया था और माना जा रहा है कि इस मैच में भारत 2007 की गलती को सुधारने की कोशिश करेगा. हालांकि तब से अब हालात काफी बदले हैं. 2007 में गैरी कर्स्टन को भारत का कोच बनाया गया. तेंदुलकर सहित कई अन्य खिलाड़ियों ने कोच के रूप में कर्स्टन को सराहा है.

सलामी बल्लेबाजों के तौर पर इस बार तेंदुलकर के साथ वीरेंद्र सहवाग दिखाई देंगे. इनके बाद गौतम गंभीर, विराट कोहली और यूसुफ पठान से भी काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से उम्मीद है कि वह अंतिम के ओवरों में जल्दी रन बनाने का जलवा दिखाएंगे.

भारत विश्व कप मैचों में बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज, आयरलैंड और नीदरलैंड्स के साथ ग्रुप बी में है. विश्लेषकों का मानना है कि क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में भारत की टीम को ज्यादा दिक्कत नहीं होनी चाहिए. हालांकि टीम को अपनी गेंदबाजी पर ध्यान देना होगा. जहीर खान और प्रवीण कुमार की गेंदबाजी टीम के लिए बहुत जरूरी साबित होगी.

टीम से उम्मीदें आसमान को छू रही होंगी, लेकिन जैसा इंग्लैंड के पूर्व कोच डंकन फ्लेचर कहते हैं, "भारत इन हालात में काफी लोकप्रिय हैं, खासकर मैच भी उन्हीं के देश में हो रहे हैं. लेकिन उन पर दबाव भी भारी होगा. देखना है कि वे इस दबाव को कैसे संभालते हैं". वहीं कप्तान धोनी का कहना है कि भारत में "स्थिति अलग होगी और बल्लेबाजों के लिए एक या दो पारियों का सवाल है. सब सही हो जाएगा."

रिपोर्टः एएफपी/एमजी

संपादनः ए कुमार

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