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दुनिया

तुर्क सैनिक कार्रवाई में 100 कुर्द विद्रोहियों की मौत

दक्षिण पूर्व तुर्की में सेना का प्रतिबंधित कुर्द संगठन पीकेके के खिलाफ पिछले कई दिनों से चल रहा व्यापक अभियान जारी है. आज इस्तांबुल में पुलिस कार्रवाई में दो महिला आतंकवादियों को मारने का दावा किया गया है.

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सेना के हमले में नष्ट घर

दियारबाकीर से मिली खबरों के अनुसार सिरनाक प्रांत में सिज्रे और सिलोपी शहरों में भारी लड़ाई चल रही है, लेकिन मरने वालों और घायल होने वालों के बारे में कोई ताजा सूचना नहीं है. रविवार को सेना के सूत्रों ने कहा था कि सैन्य अभियान में 100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. बुधवार से कम से कम 102 पीकेके लड़ाकों, दो सैनिकों और 5 असैनिक नागरिकों के मारे जाने की खबर है. कुर्दों की स्वायत्तता के लिए लड़ रहे पीकेके के खिलाफ ताजा अभियान में सेना और पुलिस की विशेष टुकड़ी के 100,000 जवान भाग ले रहे हैं. कुर्द विद्रोहियों ने 1984 में तुर्की के कुर्द इलाकों में अधिक अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया था.

Türkei Schulkinder in Diyarbakir

दियारबाकिर में स्कूली बच्चे

सेना के इस अभियान के बीच मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मंगलवार को इस्तांबुल में आतंकवाद विरोधी पुलिस की कार्रवाई में दो महिलाएं मारी गईं. पुलिस ने रात में व्यस्त इलाके गाजियोस्मांपासा में उग्रपंथियों के एक ठिकाने पर छापा मारा. वहां मौजूद दो महिलाओं ने पुलिस पर गोलियां चलाईं. जवाबी गोलीबारी में वे मारी गईं. उनकी पहचान नहीं बताई गई है. यह इलाका कुर्द श्रमिक पार्टी पीकेके के समर्थकों का गढ़ माना जाता है. पुलिस का मानना है कि दोनों महिलाएं एक आतंकी सेल की थीं जो दिसंबर के शुरू में इस्तांबुल के एक मेट्रो स्टेशन पर हुए बम हमले के लिए जिम्मेदार है.

सेना और पीकेके के बीच बढ़ते संघर्ष का असर तुर्की के दक्षिण पूर्वी हिस्से में स्कूली छात्रों पर भी पड़ रहा है. स्कूल बंद हैं और छात्रों की पढ़ाई नहीं हो रही है. सिर्फ मार्दिन प्रांत के नुसाइबिन जिले में ही कर्फ्यू की वजह से 25,000 छात्रों के स्कूल बंद हैं. ट्रेड यूनियन संगठन के अनुसार बच्चे हाई स्कूल जाने के लिए जरूरी महत्वपूर्ण इम्तहान भी नहीं दे पाए हैं. राजधानी दियारबाकीर में सूर इलाके में करीब 3000 बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं.

Türkei pro kurdische Demonstration in Istanbul

इस्तांबुल में कुर्दों के समर्थन में रैली

नए विवाद की वजह से जर्मनी की वामपंथी पार्टी डी लिंके ने जर्मन सरकार से तुर्की को हथियारों की सप्लाई रोकने की मांग की है. पार्टी प्रमुख बैर्न्ज रीसिंगर ने कहा है कि अपनी जनता के खिलाफ इन हथियारों का इस्तेमाल नाटो के समझौते के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि चांसलर हेल्मुट कोल ने 1992 में इन्हीं कारणों से तुर्की को हथियारों की सप्लाई रोक दी थी. डी लिंके के प्रमुख ने विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर से अंकारा जाकर विवाद को सुलझाने की पहल करने की मांग की है.

तुर्की की सरकार और कुर्द विद्रोहियों का संघर्ष पिछले 30 साल से चल रहा है. इसमें अब तक 45,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. 1999 में पीकेके के प्रमुख अब्दुल्ला ओएचेलान की गिरफ्तारी के बाद संगठन ने आजादी की अपनी मांग छोड़ दी है. तुर्की, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने पीकेके को आतंकी संगठन का दर्जा दे रखा है. लेकिन सीरिया का कुर्द विद्रोही संगठन पीवाईडी न तो अमेरिका में और न ही ईयू में आतंकी संगठनों की लिस्ट पर है, जिसकी तुर्की आलोचना करता है. अमेरिका तो आईएस के खिलाफ पीवाईडी की हथियारों से मदद भी कर रहा है. इस साल राष्ट्रपति रेचेप त्य्यप एरदोवान की पहल पर शुरू शांति वार्ता के टूटने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है. पिछले हफ्तों में आतंकवाद विरोधी संघर्ष के तहत तुर्की ने पीकेके के खिलाफ कार्रवाई में तेजी ला दी है.

Symbolbild Abdullah Öcalan

1999 से गिरफ्तार अब्दुल्लाह ओएचलान

एरदोवान के शासनकाल में तुर्की ने कुर्दों को धीरे धीरे ज्यादा अधिकार दिए हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में अभी भी कुर्द बच्चों को कुर्द मातृभाषा में शिक्षा नहीं दी जा रही है. इलाके के चार देशों तुर्की, सीरिया, इराक और ईरान में करीब 2.4 करोड़ कुर्द रहते हैं. उनका कहना है कि वे ऐसी राष्ट्रीयता हैं जिनके पास अपना राज्य नहीं है. तुर्की की आबादी में 18 प्रतिशत हिस्सा कुर्दों का है.

एमजे/एसएफ (डीपीए, एएफपी)

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