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दुनिया

तुर्की से वीजा फ्री बातचीत

किसी भी यूरोपीय नागरिक को तुर्की जाने के लिए वीजा नहीं लेना पड़ता है. लेकिन तुर्क नागरिकों को ऐसी सुविधा कभी नहीं मिली जिसकी वजह से उनमें इस मुद्दे पर काफी असंतोष रहा है.

तुर्की और यूरोपीय संघ (ईयू) ने सोमवार को अंकारा में तुर्की प्रवासियों के वीजा और अन्य नियमों को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के अनुसार आपसी बातचीत से ऐसी व्यवस्था बनायी जा सकेगी जिसके तहत तुर्क नागरिकों को यूरोप आने के लिए वीजा की जरूरत नहीं होगी. इसके बदले में तुर्की को भी ऐसे प्रवासियों को वापस बुलाना होगा जो उनके देश की सीमा से गैरकानूनी रूप से यूरोप में आए हैं. एक बार यूरोप में आ जाने के बाद उनके लिए अपने देश वापस जाना बहुत दुश्वार हो जाता है.

ईयू की सदस्यता की बातचीत फिर शुरू

तुर्क नागरिकों की यूरोप में वीजा मुक्त यात्रा और बार बार प्रवेश की अनुमति की मांग पर लंबे समय से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. लेकिन कुछ हफ्ते पहले ही दोनों पक्षों के बीच तीन साल से बंद पड़ी बातचीत बहाल हुई. तुर्की को यूरोपीय संघ की सदस्यता दिए जाने के विषय पर बातचीत फिर शुरू होना अच्छा संकेत माना जा रहा है.

तुर्की के साथ ये बातचीत 2005 में ही शुरू हो गई थी लेकिन साइप्रस के साथ उसके विवाद के चलते बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी. ये विवाद 1974 से चल रहा है जब ग्रीस की सेना ने साइप्रस में तख्तापलट कर दिया था. इसी दौरान तुर्की ने भी हमला कर इस द्वीप के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था. यूरोप की पूर्वी सीमा पर स्थित ग्रीस में तभी से तुर्की के बहुत लोग रह रहे हैं. करीब आठ करोड़ की आबादी वाला मुस्लिम बहुल देश तुर्की यूरोप और एशिया महाद्वीप के बीच स्थित है. इस वजह से भी बहुत सारे एशियाई प्रवासी अवैध तरीके से यूरोप में घुसने के लिए तुर्की का इस्तेमाल करते हैं.

ये कदम है 'मील का पत्थर'

यूरोपीय संघ ने कहा है कि वो 2017 तक तुर्क नागरिकों के लिए वीजा मुक्त यात्रा को शुरू करने का प्रयास करेगा बशर्ते तुर्की जल्दी से जल्दी अपना वादा पूरा करे. तुर्की के प्रधानमंत्री रेचप तैयब एर्दोगान ने अपना वादा पूरा करने का भरोसा दिलाया है. एर्दोगान अगले महीने ब्रसेल्स जाने वाले हैं और जनवरी में ही फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रोंसुआ ओलांद भी तुर्की का दौरा करेंगे. एर्दोगान कहते हैं, "इन मुलाकातों से यूरोपीय संघ के साथ हमारे संबंधों में आए एक नये जोश और बल का भी पता चलता है."

दोनों पक्षों की ओर से इस समझौते को एक मील का पत्थर माना जा रहा है. दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ ये आशंकाएं भी जता रहे हैं कि अगर तुर्की सभी अवैध प्रवासियों को वापस बुलाने में सफल नहीं होता है तो ये प्रक्रिया ठप पड़ सकती है. तुर्की खुद भी सीरिया में चल रहे गृह युद्ध के कारण वहां से आए शरणार्थियों की समस्या से जूझ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2014 तक तुर्की में सीरियाई शरणार्थियों की तादाद 15 लाख को पार कर जाएगी.

आरआर/ओएसजे (एपी,एएफपी)

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