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ताना बाना

तुर्की में संविधान सुधार पर जनमत संग्रह

तुर्की में संविधान बदलने पर जनमत संग्रह के दौरान अहम वोटिंग पूरी हो गई है. मतदान से पहले सर्वे करने वाली एजेंसी कोंडा ने सरकार के जीत का दावा किया है. सरकार के मुताबिक यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए जरूरी सुधार.

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सरकार का कहना है कि ये सुधार देश में लोकतंत्र को और मजबूत करने के लिए जरूरी हैं. लोकतंत्र मजबूत हुआ तो तुर्की के यूरोपीय संघ में शामिल होने के रास्ते की बाधाएं दूर हो जाएंगी. संविधान में बदलाव के इन प्रस्तावों के लागू होने के बाद संविधान का ढांचा यूरोपीय संघ के मुताबिक हो जाएगा. उधर, सीएचपी समेत सभी विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इन सुधारों के जरिए सरकार और सत्ताधारी पार्टी का देश की न्याय व्यवस्था में दखल बढ़ जाएगा.

Türkei Proteste Referendum

चुनाव से पहले हुए सर्वे में 56.8 फीसदी लोगों ने सरकार के सुधारों के पक्ष में होने की बात कही. हालांकि इस सर्वे में 17.6 फीसदी लोगों ने कोई फैसला नहीं दिया. सर्वे के मुताबिक अगर सरकार की जीत होती भी हो तो फासला बहुत थोड़े का होगा. सुधार पर वोट देने वाले लोगों में खासा उत्साह है. विदेश में रहने वाले तुर्क लोगों के लिए एयरपोर्ट और तुर्की की सीमा पर वोटिंग के इंतजाम हैं. तुर्क लोगों ने हफ्तों पहले से ही वोट डालना शुरू कर दिया है. फ्रांस से इस्तांबुल जा रहे मुरात सुन्मेज ने बड़े उत्साह से कहा, " मैंने सरकार के प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है मैं चाहता हूं कि हमारा देश जल्दी से यूरोपीय संघ में शामिल हो जाए."

हालांकि प्रस्ताव का विरोध करने वाले भी कम नहीं हैं बेल्जियम में रहने वाली गृहिणी सानिया कोजर ने प्रस्ताव का विरोध किया है.कोजर ने कहा, "ये प्रस्ताव तुर्की के समाज के लिए अच्छे नहीं हैं. इनसे सिर्फ एर्दवान की पार्टी मजबूत होगी. मैं इन सुधारों के खिलाफ हूं."

सत्ताधारी पार्टी एकेपी खुद को यूरोप की क्रिस्टियन पार्टियों का मुस्लिम अवतार कहती है. लेकिन आलोचकों का मानना है कि पार्टी का एक छिपा हुआ मुस्लिम एजेंडा है. वे मानते हैं कि एकेपी देश को इस्लामीकरण की तरफ ले जा रही है. तुर्की में अगले साल आम चुनाव हैं. ऐसे में सुधार पर जीत को सरकार के भविष्य के रूप में भी देखा जा रहा है. अगर सरकार हारी तो पार्टी के मनोबल पर बुरा असर होगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए जमाल

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