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दुनिया

तुर्की में विधायिका और न्यायपालिका में ठनी

तुर्की के एक वरिष्ठ कानूनी सलाहकार ने प्रधानमंत्री तैयब एर्दोआन को चेतावनी दी है कि न्यायपालिका को बाधित करना संविधान के खिलाफ होगा. भ्रष्टाचार की रिपोर्टों के बाद देश अस्थिर होता दिख रहा है.

इस घोटाले ने प्रधानमंत्री एर्दोआन को थोड़ा अस्थिर कर दिया है. अब वह संकेत देना चाहते हैं कि सत्ता उनके हाथ में है. उप प्रधानमंत्री अली बाबाखान ने कहा, "सरकार नियंत्रण कर रही है. हम तुर्की की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता पर आंच नहीं आने देंगे." 11 साल से तुर्की के प्रधानमंत्री रहे एर्दोआन का कहना है कि उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप उनकी सरकार के खिलाफ साजिश है.

नियंत्रण की लड़ाई

दिसंबर में भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित गिरफ्तारियों के बाद एर्दोआन की सरकार ने कई तुर्की शहरों में करीब 700 पुलिसकर्मियों को नौकरी से निकाल दिया. जांच के बारे में एर्दोआन का कहना है कि न्यायपालिका देश को अपने नियंत्रण में लाना चाहती है. एर्दोआन की एके पार्टी ने इस हफ्ते कुछ खास योजनाएं भी पेश की हैं, जिसके तहत सरकार जजों और अभियोजन पक्ष के वकीलों की नियुक्ति पर सीधे नजर रख सकेगी.

लेकिन सरकारी जज और वकील परिषद एचवाईएसके के उपाध्यक्ष अहमद हमीसी कहते हैं कि यह कानून जजों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित करेगा. हमीसी ने कहा है कि सरकार का यह फैसला न्यायपालिका की आजादी और लोकतंत्र में जिम्मेदारियों के बंटवारे के खिलाफ है. सरकार के नए प्रस्ताव में एचवाईएसके के काम पर न्याय मंत्री कड़ी निगरानी रख सकेगा.

साजिश या सच्चाई

एर्दोआन और उनके करीबी पार्टियों ने एक इस्लामी धार्मिक नेता फतुल्लाह गूलेन को दोषी ठहराया है जो वैसे तो अमेरिका में रहते हैं लेकिन वहीं से तुर्की की पुलिस और न्यायपालिका को नियंत्रित करते हैं. तुर्की की राजनीति में दरार दर्शाता यह मामला पिछले महीने दिसंबर में सामने आया, जब कई नेताओं और व्यापारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया. इनमें तीन मंत्रियों के बेटे भी शामिल थे. इस घटना के बाद तीनों मंत्रियों ने इस्तीफा दिया और एर्दोआन को अपने मंत्रिमंडल में नए लोग लाने पड़े.

लेकिन इसके बाद से एर्दोआन और उनकी सरकार पुलिस और न्यायपालिका पर निशाना साधते दिख रहे हैं. प्रधानमंत्री के आलोचक कहते हैं कि वह जांच में फंसे अपने करीबी लोगों को बचाने

की कोशिश कर रहे हैं. माना जा रहा है कि घोटाले में कुछ निर्माण कंपनियां शामिल हैं. एक राष्ट्रीय बैंक भी जांच के दायरे में आया है. बैंक से गैरकानूनी तरीके से ईरान को पैसे ट्रांसफर किए गए.

घोटाले का बुरा असर तुर्की शेयर बाजार में साफ दिख रहा है. यूरोपीय संघ और अमेरिका ने एर्दोआन के रुख की कड़ी आलोचना की है. न्यायपालिका की आजादी छीनना यूरोपीय संघ के मानकों के खिलाफ है और संघ का सदस्य होने की ख्वाहिश रखने वाले तुर्की को इससे बाद में दिक्कत हो सकती है.

एमजी/एजेए (एएफपी, एपी)

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