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दुनिया

तीन साल में माओवादियों पर काबू पा लेंगे: चिदम्बरम

माओवाद की समस्या से जूझ रही केंद्र सरकार ने अगले तीन सालों में माओवादियों पर काबू पाने का विश्वास जताया है. सरकार ने दो सूत्री रणनीति तैयारी की है जिसके अन्तर्गत विकास के साथ साथ प्रभावित इलाकों में पुलिस कार्रवाई होगी.

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भारत के गृहमंत्री चिदंबरम

दिल्ली में एक बैठक को संबोधित करते हुए गृहमंत्री पी चिदम्बरम ने उम्मीद जाहिर की है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिल कर माओवादियों पर नियंत्रण पा लेंगी. "सरकार आश्वस्त है कि वामपंथी चरमपंथ को अगले तीन सालों में काबू में किया जा सकता है." नक्सल प्रभावित राज्यों की सरकार से विचार विमर्श के बाद चिदम्बरम ने दो सूत्री रणनीति तैयार की है.

इसके तहत विकास और पुलिस कार्रवाई के जरिए इस समस्या का सामना किया जाएगा. केंद्र सरकार ने माना है कि माओवादियों से मुकाबले के लिए कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का पहला दायित्व राज्य सरकारों का ही बनता है, लेकिन यह भी कहा है कि केंद्र की जिम्मेदारी राज्यों को हर तरह से मदद मुहैया कराना है.

गृहमंत्री का कहना है कि केंद्र सरकार नक्सल प्रभावित राज्यों को अर्धसैनिक बल मुहैया करा रही है, खुफिया सूचनाओं का आदान प्रदान हो रहा है और विकास और सुरक्षा कार्य से जुड़ी योजनाओं के लिए वित्तीय मदद भी दी जा रही है. चिदम्बरम ने बताया कि 14 जुलाई को नक्सल प्रभावित सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत में सहमति हुई कि चार राज्यों - पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, और झारखंड - में नक्सल विरोधी अभियान के लिए एकीकृत कमान की व्यवस्था की जाएगी.
केंद्र सरकार इन राज्यों को मदद के लिए अतिरिक्त हेलीकॉप्टर देने के अलावा करीब 400 पुलिस स्टेशनों को दुरुस्त करने और नई भर्तियां करने के लिए फंड उपलब्ध कराएगी. नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों पर पुनर्विचार करने और उनको अमली जामा पहनाने के लिए एक समूह की स्थापना होगी जिसकी अध्यक्षता योजना आयोग का सचिव करेगा.

एक अनुमान के मुताबिक सात राज्यों में 40 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका माओवादियों के नियंत्रण में है. पिछले पांच सालों में नक्सली हिंसा में अब तक 10 हजार से ज्यादा आम लोगों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: वी कुमार