1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

तीन नए ग्रह जहां जीवन संभव है

वैज्ञानिकों ने ऐसे तीन नए ग्रहों की खोज का दावा किया है जहां मानव जीवन संभव है. लेकिन क्या वाकई हम वहां जी सकते हैं?

बेल्जियम और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने ऐसे तीन नए ग्रह खोज निकाले हैं जहां मानव रिहाइश संभव होने की उम्मीद की जा रही है. इन ग्रहों की अपने सूरज से दूरी इतनी है कि वहां की सतह का तापमान पानी के टिकने योग्य हो सकता है.

किसी भी ग्रह में रिहाइश के लिए ये बहुत जरूरी है कि वहां का तापमान ना तो बेहद गर्म हो और ना ही ठंडा. ऐसे ग्रह का आकार भी पृथ्वी के द्रव्यमान के अनुसार ही होना चाहिए वरना गुरूत्वाकर्षण एक दिक्कत साबित हो सकती है. इस लिहाज से ये खोजे गए ग्रह सभी शर्तें पूरी करते हैं. ये ग्रह एक शांत और बेहद छोटे परिपथ पर परिक्रमा करते हैं. इसका मतलब है कि इनके सूरज का आकार हमारे सूरज की तुलना में तकरीबन आठ गुना कम है. जिसके चलते ये ग्रह औसतन ठंडे हैं. इन ग्रहों की दूरी अपने तारे से उतनी है जहां कि जीवन संभव है.

खास टेलिस्कोप से खोज

शोधकर्ताओं ने पृथ्वी जैसे इन ग्रहों को एक खास तरह के टेलिस्कोप, ट्रांजिटिंग प्लैनेट्स एंड प्लेनेट्सिमल्स स्मॉल टेलिस्कोप यानि टीआरएपीपीआईएसटी के जरिए खोजा है. टीआरएपीपीआईएसटी को बेल्जियन यूनिवर्सिटी ऑफ लिएज संचालित करता है और यह ला सिला चिली में मौजूद यूरो​पियन सदर्न ऑब्जर्वेट्री का हिस्सा है.

यह छोटा सा टेलिस्कोप आकार में महज 60 सेंटीमीटर का है. लेकिन ग्रहों की दूरी और द्रव्यमान को मापने के लिए इसमें एक शानदार विधि का इस्तेमाल किया गया है. ये टेलिस्कोप उस वक्त ग्रह के तारे के प्रकाश की तीव्रता को दर्ज कर लेता है जब ये ग्रह उसके सामने से गुजरता है. इसका ​इस्तेमाल करते हुए ग्रह के आकार, द्रव्यमान और परिक्रमा के परिपथ का पता लगाया जाता है. ​कम क्षमताओं वाले तारों के साथ इस टेलिस्कोप का इस्तेमाल करना ज्यादा आसान है.

उम्मीद कायम मगर बेहद दूर

परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि एक दिन पृथ्वी के बाहर भी जीवन संभव होगा. उन्होंने अपने निष्कर्षों को 'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित किया है.

पृथ्वी जैसे ये तीन ग्रह अपेक्षाकृत हमारे सौरमंडल के कुंभ राशि नक्षत्र के सबसे नजदीक हैं. लेकिन ये दूरी भी 39 प्रकाश वर्ष है, जिसे पार करना अभी वैज्ञानिकों के लिए संभव नहीं है. इस दूरी को पार करने में अब तक के किसी भी स्पेसक्राफ्ट को कम से कम 30 हजार साल लगेंगे. हालांकि ये दूरी इतनी भी नहीं है कि वैज्ञानिक इस जानकारी का कुछ ना कर सकें. मौजूदा तकनीक की मदद से वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या वहां कैसा वातावरण है.

क्या जा पाएंगे हम सौरमंडल से बाहर?

भविष्य में हम एक मानव रहित अंतरिक्ष यान को अपने सौरमंडल से बाहर भेजने में कामयाब हो सकते हैं. इसके लिए एक दीर्घकालीन योजना और भरपूर धैर्य की जरूरत होगी. रूसी अरबपति यूरी मिल्नर, भौतिक विज्ञानी स्टीफन हाकिंग और फेसबुक के मालिक मार्क जकरबर्ग ने अप्रैल में इस तरह की योजना पर विचार कर रही एक बैठक में हिस्सा लिया.

इनका विचार है कि एक ऐसा छोटा अंतरिक्ष यान बनाया जाए जिसे लेजर बीम की मदद से प्रकाश की गति के पांचवे हिस्से की गति दी जा सके. अगर ऐसा हो सका तो हमारे पड़ोसी सौरमंडल एल्फा सेंटाउरी तक महज 20 सालों में पहुंचा जा सकेगा.

आरजे/आरपी (रायटर्स,एपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री