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दुनिया

तिलमिलाए कलमाड़ी का एमएस गिल पर पलटवार

खेल संस्थाओं में पदाधिकारियों का कार्यकाल तय करने के सरकारी फ़ैसले से खेल प्रशासक बिफ़र उठे हैं. ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी समेत अन्य पदाधिकारियों ने स्वायत्ता बनाए रखने के लिए हर क़दम उठाने की बात कही है.

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भारत की खेल संस्थाओं में अहम पदों पर नेताओं या बड़े नौकरशाह ही आसीन होते हैं और अधिकतर पद ऐसे हैं जिनमें दशकों से कोई बदलाव नहीं हुआ है. पारदर्शिता और पेशेवर रवैया लाने के लिए खेल मंत्रालय ने कार्यकाल को सीमित करने के नए नियमों को लागू करने की बात कही लेकिन यह पहल खेल पदाधिकारियों को नागवार गुज़री है.

पिछले 14 साल से इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) के अध्यक्ष पद पर विराजमान सुरेश कलमाड़ी ने कहा है कि वह सरकार के इस फ़ैसले से हैरान हैं. "यह बेहद कठोर आदेश है जिससे आईओए की स्वायत्ता पर ही सवाल उठाया गया है. हम खेल मंत्रालय के इस प्रयास को ख़ारिज करते हैं क्योंकि आईओए और नेशनल स्पोर्ट्स फ़ेडरेशन (एनएसएफ़) की स्वायत्ता को चुनौती दी जा रही है."

सुरेश कलमाड़ी ने कहा है कि स्वायत्ता बनाए रखने के लिए वह हरसंभव क़दम उठाएंगे. इस संबंध में रणनीति तय करने के लिए बैठकों का दौर शुरू हो गया है. खेल मंत्री पर निशाना साधते हुए कलमाड़ी ने कहा कि खेल अधिकारी कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में व्यस्त हैं और ऐसे समय में एमएस गिल को यह अधिकार नहीं है कि वह इस तरह से फ़रमान जारी करें.

Der Indische Sportminister M S Gill

खेल मंत्री की खरी-खरी

"यह आदेश जिस समय पर जारी किया गया है उससे हम हैरान हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में क़रीब 150 दिन बचे हैं और ऐसे समय में खेल मंत्रालय आदेश जारी कर रहा है. इससे देश का भला नहीं होगा." कलमाड़ी ने यह नहीं बताया कि देश का भला आख़िर कैसे होगा. कलमाड़ी ने एमएस गिल के उस दावे को भी ख़ारिज कर दिया कि नए नियमों से पारदर्शिता आएगी.

कलमाड़ी के मुताबिक़ आईओए आरटीआई एक्ट (सूचना का अधिकार) के दायरे में काम करता है और इसको सभी पदाधिकारियों ने स्वीकार कर लिया क्योंकि छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है. एनएसएफ़ के ख़िलाफ़ एक भी शिकायत दर्ज नहीं की गई है. सब कुछ क़ायदे से चल रहा है और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने की पूरी तैयारी हो रही है. ऐसे में इस आदेश का तुक नहीं बनता.

खेल मंत्री एमएस गिल ने कहा है कि कार्यकाल सीमित करने संबंधी नए दिशानिर्देश किसी ख़ास व्यक्ति के ख़िलाफ़ केंद्रित नहीं हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स से कुछ ही महीने पहले घोषणा करने के अपने फ़ैसले का भी उन्होंने बचाव किया है. "इस फ़ैसले का खेलों से कुछ नहीं लेना देना है. वह अलग मामला है. मुझे किसी से कोई दिक्कत नहीं है. मैं अपना काम करने की कोशिश कर रहा हूं और इसी के लिए मुझे तनख़्वाह मिलती है."

जो नए दिशा निर्देश जारी किए गए थे उसके मुताबिक़ नेशनल स्पोर्ट्स फ़ेडरेशन (एनएसएफ़) के अध्यक्ष का कार्यकाल 12 साल तक सीमित हो जाएगा. वह लगातार 12 साल अपने पद पर बने रह सकते हैं या फिर अलग अलग कार्यकाल में 12 साल की अवधि पूरी कर सकते हैं.

सचिव या खजांची के पद पर चार चार साल के दो कार्यकाल निर्धारित किए गए हैं. लेकिन एक बार चुने जाने के बाद उन्हें अगले चार साल बाद अपने पद से हटना होगा. उसके बाद ही वे नए कार्यकाल के लिए चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे. खेल संस्थाओं के सभी सदस्यों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 70 साल निर्धारित की गई है. भारत में सरकारी नौकरियों में सामान्यतया रिटायरमेंट की उम्र अधिकतम 62 साल है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: एस गौड़

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