तिरुपति जाना है तो ″ढंग″ के कपड़ों में | दुनिया | DW | 05.06.2010
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दुनिया

तिरुपति जाना है तो "ढंग" के कपड़ों में

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी हो रही है. यानी वे लोग भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन नहीं कर सकेंगे जिन्होंने "ढंग" के कपड़े नहीं पहने होंगे.

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देवस्थानम के कार्यकारी अधिकारी आईवाईआर कृष्णा राव ने बताया, "हम अपने कर्मचारियों से कहने वाले हैं कि वे ऐसे लोगों को न आने दें जिन्होंने अशोभनीय कपड़े पहने हों. इसका मतलब है कि बरमुडा, शॉर्ट्स या टी शर्ट पहने हुए लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. कमीज और पेंट पहने हुए लोग आ सकते हैं." राव के मुताबिक "अश्लील पहनावे" को रोकने के लिए यह फैसला किया गया है.

कुछ शिकायतों के बाद "अशोभनीय" कपड़े वाले लोगों के खिलाफ यह फैसला लिया जा रहा है. हालांकि यह अभी एक प्रस्ताव है लेकिन सूत्रों का कहना है कि देवस्थानम आने वाले कुछ महीनों में इसे लागू कर देगा. बीजेपी, कुछ हिंदू संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने इस फैसले का स्वागत किया है. बीजेपी नेता भानुप्रकाश रेड्डी ने कहा, "हम इस फैसले का स्वागत करते हैं. मंदिर में हर व्यक्ति को पारंपरिक कपड़े पहनने चाहिए. अशोभनीय कपड़े पवित्र पहाड़ी पर बने इस मंदिर के आध्यात्मिक माहौल को दूषित करते हैं."

BdT Bayerische Kleidung

देवस्थानम ने अपने कर्मचारियों से पारंपरिक कपड़े पहनने को पहले ही कह दिया है. सूत्रों का कहना है कि समस्या तब पैदा होती है जब कुछ विदेशी या फिर बाहर से आने वाले रिसर्चर मंदिर में आते हैं. एक अधिकारी का कहना है, "कुछ अमीर, लेकिन बिगड़ैल बच्चे भी बहुत तंग कपड़े पहन कर मंदिर में आते हैं जिससे दूसरे लोगों को परेशानी होती है."

शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान कई श्रद्धालुओं ने अपनी समस्याएं रखी जिसके बाद मंदिर में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड की तैयारियों को मजबूती मिली. मंदिर में होने वाले सुप्रभातम, थोमाला, अर्चना और कल्याणोत्सव जैसे विशेष अनुष्ठानों में हिस्सा लेने वाले पुरुषों के लिए धोती या पायजामा और महिलाओं के लिए साड़ी या पायजामा पहनने का नियम 2004 से ही लागू है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एस गौड़

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