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दुनिया

तालिबान हमले पर अमेरिका चुप

पाकिस्तान तालिबान के नंबर दो वली उर रहमान की एक ड्रोन हमले में मारे जाने की खबर है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है. लेकिन ड्रोन हमलों में पारदर्शिता का वादा करने वाले अमेरिका ने इस पर चुप्पी साध रखी है.

पिछले हफ्ते ही राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रहस्यमयी ड्रोन हमलों के बारे में विस्तार से बात की थी और कहा था कि किस तरह यह अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. हालांकि उन्होंने वादा किया था कि भविष्य में इसमें पारदर्शिता बरती जाएगी.

पाकिस्तान के सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों ने कहा है कि तहरीके तालिबान में दूसरे नंबर के नेता वली उर रहमान की एक ड्रोन हमले में मौत हो गई है. रहमान के साथ उत्तरी वजीरिस्तान में पांच और लोग मारे गए. अमेरिका पहले भी इस तरह के मामलों में कोई बयान नहीं देता था और ओबामा के भाषण के बाद भी उसने इस पर कुछ नहीं कहा है.

पुष्टि नहीं की

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी ने कहा, "हम वली उर रहमान की मौत की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं हैं. अगर ये रिपोर्टें सही हैं या सही साबित होती हैं, तो यह समझना जरूरी है कि टीटीपी ने अपने दूसरे सबसे प्रमुख शख्सियत और उसके प्रमुख सैनिक रणनीतिकार खो दिया है."

पाकिस्तान के सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि उत्तरी वजीरिस्तान के दो घरों में ड्रोन हमले हुए, जिनमें रहमान के अलावा पांच और लोग मारे गए. अमेरिका ने रहमान के सिर पर 50 लाख डॉलर का इनाम रखा था. खुफिया विभाग के लोगों ने भी इस हमले की पुष्टि कर दी है, जो मिरानशाह के चश्मा इलाके में किया गया. यह जगह तालिबान और अल कायदा का गढ़ माना जाता है.

कौन था रहमान

रहमान एक धार्मिक पृष्ठभूमि का शख्स बताया जाता है, जिसने वजीरिस्तान में अपना मदरसा खोल रखा था, जिसमें बच्चों को पढ़ाया जाता था. बताया जाता है कि बाद में बच्चों को आतंकवाद की राह पर ढकेल दिया जाता था.

पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तालिबान के साथ बातचीत का समर्थन करते आए हैं. लेकिन ताजा हमले के बाद तालिबान के साथ शांतिपूर्वक बातचीत की संभावना कम हो गई है. रहमान को तालिबान का नरम चेहरा माना जाता था, जिसकी प्राथमिकता पाकिस्तान के अंदर हमलों की जगह विदेशी ताकतों पर हमला करने की थी.

Dronenangriff Pakistan Taliban Wali-ur Rehman (rechts)

महसूद के साथ वली उर रहमान

रहमान की अमेरिका और नाटो सैनिकों पर हमले के एक मामले में भी तलाश थी. यह हमला 30 दिसंबर, 2009 को अफगानिस्तान के खोस्त इलाके में हुई थी और जिसमें अमेरिकी नागरिकों की भी मौत हुई थी.

कई हमलों का जिम्मेदार

व्हाइट हाउस प्रवक्ता कार्नी ने उस हमले का भी जिक्र किया और उसे सीआईए के इतिहास में एक काला दिन बताया. इसमें आतंकवाद निरोधी सात एजेंटों के अलावा एक ठेकेदार की भी मौत हुई थी. कार्नी ने इस पर भी कोई टिप्पणी नहीं की कि क्या ताजा हमला अमेरिकी ड्रोन नीति के अनुरूप है.

ओबामा ने अपने भाषण में कहा था कि ऐसे हमले सिर्फ "अमेरिका पर हमलों और अमेरिकियों की सुरक्षा" को ध्यान में रख कर किए जाएंगे. सीआईए ने भी इस हमले पर चुप्पी साध रखी है.

ब्रिटेन के ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमलों में अब तक 3587 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कम से कम 884 आम शहरी हैं.

एजेए/एमजे (एएफपी, डीपीए, एपी)

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