तालिबान से वार्ता पर सेना से मतभेद नहीं | दुनिया | DW | 01.11.2013
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दुनिया

तालिबान से वार्ता पर सेना से मतभेद नहीं

पाकिस्तान के सूचना मंत्री परवेज रशीद ने कहा है कि तालिबान के साथ शांति वार्ता के लिए माहौल तैयार है. उन्होंने सेना के साथ वार्ताओं को लेकर किसी भी मतभेद से इंकार किया है.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बुधवार को कहा था कि तालिबान के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है, लेकिन पाकिस्तान तालिबान के प्रवक्ता शाहिदुल्लाह शाहिद ने मीडिया से कहा था कि सरकार ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है. परवेज रशीद का कहना है, "सेना, विपक्ष और सरकार सहित सभी पक्ष समान राय के हैं."

वार्ता शुरू करने को राजनीतिक दलों के समर्थन के बाद पाकिस्तानी तालिबान ने शर्तों की एक सूची जारी की थी. उन्होंने पाकिस्तानी जेलों में बंद अपने सभी साथियों की रिहाई के अलावा अफगानिस्तान की सीमा पर स्थित कबायली इलाकों से सेना को हटाने की भी मांग की थी. इस इलाके को उग्रपंथियों और अल कायदा के लड़ाकों के छिपने की जगह समझा जाता है. शाहिद ने शुक्रवार को उन शर्तों को फिर से दुहराया.

उधर तालिबान के एक कमांडर ने समाचार एजेंसी डीपीए को बताया है कि सरकार और उग्रपंथी धार्मिक नेताओं के माध्यम से संपर्क में हैं. उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "सरकार के सकारात्मक जवाब के बाद हम बातचीत के लिए तैयार हैं और अब हम सरकार के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करने के लिए टीम बनाने पर काम कर रहे हैं."

उधर पाकिस्तानी सूचना मंत्री रशीद ने कहा है कि औपचारिक वार्ताओं के लिए राह तैयार कर दी गई है. उन्होंने कहा, "तालिबान के साथ संवाद की तैयारी की प्रक्रिया में बहुत उतार चढ़ाव आए, लेकिन अब हमने शांति वार्ता शुरू करने माहौल बना लिया है."

Pakistan Nawaz Sharif und Shabaz Sharif

नवाज शरीफ ने बुधवार को कहा था कि तालिबान के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है.

पाकिस्तानी तालिबान अफगान तालिबान से स्वतंत्र रूप से सक्रिय उग्रपंथी गुटों का संगठन है. वह पाकिस्तान में इस्लामी व्यवस्था की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहा है. पाकिस्तान की सरकार शांति संधि के जरिए हिंसा को समाप्त करवाना चाहती है लेकिन अल कायदा से जुड़े गुट बातचीत से इंकार करते रहे हैं.

मई में हुए संसदीय चुनावों के दौरान नवाज शरीफ ने वादा किया था कि वे 12 साल से चल रहे विद्रोह को खत्म करवाने के लिए बातचीत करेंगे. शरीफ ने पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे के तहत बातचीत की उम्मीद जताई है तो पाकिस्तान तालिबान ने अतीत में कहा है कि बातचीत के लिए हथियार नहीं डालेगा.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस्लामी कट्टरपंथियों ने 40,000 से ज्यादा लोगों की जान ली है. सरकार में आने के बाद शरीफ की आरंभिक पहल का जवाब तालिबान ने घातक बमबारी से दिया था जिसमें सितंबर में सेना का एक मेजर जनरल मारा गया था.

अधिकारियों के अनुसार दक्षिण पश्चिम पाकिस्तान में बोलान जिसे में एक खान में काम कर रहे मजदूरों पर संदिग्ध उग्रपंथियों के हमले में शुक्रवार को 6 लोग मारे गए. मरने वाले ज्यादातक लोग शिया संप्रदाय के थे. सुन्नी बहुल पाकिस्तान में अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोगों को अक्सर प्रताड़ित किया जाता है और हमलों का निशाना बनाया जाता है.

एमजे/एनआर (डीपीए, रॉयटर्स)

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