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दुनिया

तालिबान के शीर्ष कमांडर की हत्या

अज्ञात हमलावरों ने पाकिस्तानी तालिबान के वरिष्ठ कमांडर की हत्या कर दी है. मारे गए कमांडर पर पाकिस्तान की सरकार ने इनाम रखा था. माना जा रहा है कि आंतरिक संघर्ष की वजह से हत्या हुई है.

करीब 40 साल के असमतुल्लाह शाहीन पर पाकिस्तान की सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम रखा था और वह चरमपंथी संगठन का पूर्व अंतरिम प्रमुख था. अशांत उत्तरी वजीरिस्तान के मुख्य शहर मिरनशाह की दरगाह मंडी के पास सोमवार को शाहीन की गोली मारकर हत्या कर दी गई. जानकारों को ऐसा नहीं लगता है कि शाहीन की मौत के बाद सरकार के साथ रुकी बातचीत पर कोई असर पड़ेगा. वरिष्ठता के बावजूद शाहीन को पाकिस्तानी तालिबान के भीतर एक विवादास्पद व्यक्ति के तौर देखा जाता था. मिरनशाह में एक सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, "अज्ञात हमलावरों ने शाहीन की कार पर फायरिंग शुरू कर दी. अपने तीन सहयोगियों के साथ शाहीन की मौके पर ही मौत हो गई."

शाहीन के एक करीबी रिश्तेदार का कहना है कि मृतकों अलावा कार में सवार दो और लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं. अधिकारी के मुताबिक हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद दूसरी गाड़ी में फरार हो गए. अभी तक किसी संगठन ने हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है. लेकिन एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी ने हत्या के लिए प्रतिद्वंद्वी चरमपंथी समूह को दोषी ठहराया है.

शाहीन भिट्टानी जनजाति का नेता था और दो साल तक तालिबान के सुप्रीम काउंसिल का अध्यक्ष भी था. लेकिन दिसंबर के महीने में चरमपंथी कमांडरों के साथ मतभेद होने के बाद उसे पद से हटा दिया गया. साल 2009 में शियाओं पर हमले के बाद से शाहीन सुर्खियों में आया था. इस हमले में 43 शियाओं की मौत हो गई थी. इसके अलावा शाहीन पर 2011 में अर्द्धसैनिक बल की चौकी पर हमला कर एक सैनिक की हत्या का आरोप है. चौकी पर हमले के बाद शाहीन ने 15 जवानों का अपहरण कर लिया. बाद में 11 जवानों की हत्या कर दी गई थी लेकिन बाकी के जवान भागने में कामयाब हुए. पेशावर में खुफिया विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक शाहीन पाकिस्तानी सेना पर कई आत्मघाती हमलों का भी मास्टरामाइंड है.

सुरक्षा विश्लेषक इम्तियाज गुल के मुताबिक शाहीन की हत्या दुश्मनी का नतीजा है. गुल कहते हैं, "पहले भी चरमपंथी संगठनों ने एक दूसरे के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और असमतुल्लाह शाहीन की हत्या जाहिर तौर उन आंतरिक मतभेदों का नतीजा है."

इस महीने पाकिस्तान ने तालिबान से बातचीत शुरू की थी. लेकिन चरमपंथियों के हमले बंद नहीं हुए. सरकार और तालिबान के बीच उस वक्त वार्ता रुक गई जब तालिबान ने दावा किया कि उसने 23 अपहृत सैनिकों की हत्या कर दी है. उसके बाद से ही पाकिस्तानी वायु सेना ने तालिबान के खिलाफ हवाई हमले तेज कर दिए. गुल के मुताबिक बातचीत का भविष्य उतना उज्ज्वल नहीं नजर आ रहा है.

एए/ओएसजे (एपी, एएफपी)

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